
जेडीयू की प्रतिक्रिया- अब इन नेताओं का पार्टी गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं
पटना । जेडीयू ने वक्फ संशोधन बिल पर मोदी सरकार का समर्थन किया है। इसके बाद से नीतीश कुमार की पार्टी में घमासान मचा हुआ है। एक के बाद मुस्लिम नेताओं का इस्तीफा दे रहे है। अब तक बिल को समर्थन देने से नाराज 6 मुस्लिम नेता पार्टी को अलविदा कह चुके है। इसमें पूर्व प्रदेश सचिव एम. राजू नैयर, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहनवाज मलिक, बेतिया जिला के उपाध्यक्ष नदींम अख्तर, प्रदेश महासचिव सिए मो. तबरेज सिद्दीकी अलीग, भोजपुर से पार्टी सदस्य मो. दिलशान राईन, और खुद को मोतिहारी के ढाका विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी बताने वाले मोहम्मद कासिम अंसारी शामिल हैं।
मुस्लिम नेताओं ने नाराजगी जताकर कहा है कि पार्टी ने लाखों मुसलमानों का भरोसा तोड़ा है। हालांकि, पार्टी ने दावों को खारिज कर दिया है। वहीं, जदयू का कहना है कि राजद नेताओं ने मुस्लिम संपत्तियों पर कब्जा कर लिया है। अनवर हुसैन, जिन्हें कबाब मंत्री के रूप में जाना जाता है, एमएलसी नामांकन के लिए संपत्ति के सौदे में शामिल थे। हालांकि, नीतीश हमेशा अल्पसंख्यकों के साथ खड़े रहे हैं। इधर, बिल पर जदयू के समर्थन को लेकर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार सेक्युलर थे, हैं और रहने वाले हैं, लेकिन पार्टी के नेता नहीं है। वे आरक्षण विरोधी हैं। उनका पार्टी पर कोई कंट्रोल नहीं है।
अंसारी ने नीतिश को लिखे पत्र में कहा, वक्फ बिल पर समर्थन देकर जेडीयू ने अपनी सेक्युलर छवि वाला भरोसा तोड़ा है। इससे लाखों मुसलमानों का यकीन टूटा है। साथ ही लोकसभा में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के दिए भाषण से भी लोग आहत हुए हैं। वहीं, मोहम्मद शाहनवाज मलिक ने कहा, जेडीयू के समर्थन से लाखों-करोड़ों मुस्लिमों को धक्का लगा है। ललन सिंह के बयान काफी दुख हुआ है। मैं कई साल तक इस पार्टी में रहा। लेकिन अब इस्तीफा दे रहा हूं।
वहीं, नीतीश के करीबी जेडीयू एलएलसी गुलाम गौस भी बिल का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, बीजेपी की सरकार हमेशा मुस्लिमों के खिलाफ ही काम करती है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्ड की जमीन को छीनने की कोशिश हो रही है। वक्फ के पास जो जमीन है, उससे मुसलमानों की भलाई के लिए कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
बिहार में वक्फ की जमीन पर कई आवासीय विद्यालय बने हैं। जहां छात्र पढ़ते हैं। केंद्र सरकार ने पहले मौलाना आजाद फाउंडेशन का स्कॉलरशिप बंद किया। उसके बाद अल्पसंख्यकों के लिए बजट में कटौती की। मुसलमानों के लिए केंद्र सरकार ने पहले तीन तलाक, घर वापसी जैसे नियम बनाए। सिर्फ मुसलमानों में ही सुधार की जरूरत नहीं है। देश भर में 7 लाख एकड़ वक्फ की भूमि पर केंद्र की नजर है।
वहीं जेडीयू ओर से इन इस्तीफों पर कहा गया है कि अंसारी और मलिक पार्टी के किसी भी आधिकारिक पद पर नहीं हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि इन दोनों नेताओं का जेडीयू के संगठनात्मक ढांचे से कोई लेना-देना नहीं है। जदयू के जिला अध्यक्ष मंजू देवी ने कहा है कि डॉ. अंसारी अब पार्टी के सदस्य नहीं हैं।
