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20 करोड़ से ज्यादा मुसलमानों के मौलिक अधिकारों का बताया उल्लंघन
नई दिल्ली। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने वक्फ संशोधन बिल, 2025 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें वक्फ संशोधन बिल की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। डीएमके का दावा है कि यह कानून मुस्लिम अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन करता है और इसे प्रमुख आपत्तियों का समाधान किए बिना पारित किया गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि वक्फ का नया कानून तमिलनाडु में करीब 50 लाख मुसलमानों और पूरे भारत में 20 करोड़ से ज्यादा मुसलमानों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
बता दें तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके सरकार ने मुखर होकर वक्फ बिलक 1995 में किए गए बदलाव का विरोध किया है और इसे अल्पसंख्यकों की भावनाओं और उनके हितों के खिलाफ बताया है।
डीएमके सरकार ने 27 मार्च, 2025 को तमिलनाडु विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें केंद्र सरकार से वक्फ संशोधन बिल 2025 को वापस लेने का आग्रह किया था। सीएम स्टालिन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में विधेयक को असंवैधानिक बताया था1 तमिलनाडु सरकार ने कहा था कि यह बिल मुस्लिम समुदाय के अधिकारों और हितों पर प्रतिकूल असर डालता है। देशभर में भारी विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने वक्फ बिल 2025 लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया और इसे दोनों सदनों में पारित कर दिया गया। दोनों सदनों में डीएमके सांसदों ने विधेयक का विरोध किया। इस बिल को 6 अप्रैल 2025 को अधिसूचित किया गया है।
सरकार ने दावा किया है कि नया कानून मुस्लिम समुदाय की भलाई के लिए बनाया गया है। इससे गरीब मुसलमानों को फायदा होगा। हालांकि, मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने इसे मुस्लिम समुदाय के मौलिक अधिकारों पर हमला बताया है। यह भारत के मुसलमानों के अधिकारों का उल्लंघन करता है।

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