
चार साल बाद कोर्ट ने महिला को सुनाई मौत की सजा
हैदराबाद। तेलंगाना में सर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए एक मां ने अपनी सात महीने की मासूम बेटी की बलि दे दी। इस जघन्य अपराध के लिए 32 साल महिला को सूर्यापेट की एक कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है। आरोपी महिला बी भारती उर्फ लस्या को कोर्ट ने यह सजा सुनाई। यह घटना 15 अप्रैल 2021 की है, जब भारती ने अपने घर में विशेष पूजा के दौरान अपनी सात महीने की मासूम बच्ची की गला और जीभ काटकर उसकी बलि चढ़ा दी थी।
घटना के समय घर में उसका बीमार ससुर मौजूद था, जिसने बच्ची की चीखें सुनकर भागा भागा वहां गया देख तो वह हैरान रह गया उसने देखा कि बहू भारती खून से सने कपड़ों में बाहर जा रही है। ससुर ने तुरंत बेटे और पड़ोसियों को इसकी सूचना दी। बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। भारती के पति बी कृष्णा ने पुलिस को बताया था कि उसकी पत्नी भारती ने पूजा के दौरान कहा था कि उसने बेटी की बलि देकर सर्प दोष से मुक्ति पा ली है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भारती को गिरफ्तार कर जांच शुरू की थी।
कृष्णा ने बताया कि भारती पहले से ही मानसिक समस्याओं से जूझ रही थी और एक ज्योतिषी ने उसे सर्प दोष होने की बात कही थी, जिससे वह प्रभावित हो गई। परिवार ने खम्मम के एक मानसिक चिकित्सक से परामर्श लिया था, लेकिन भारती ने दवाएं नहीं खाईं। 2023 में भारती ने अपने पति पर भी वजनी पत्थर से सोते समय हमला किया था, जिसके बाद उस पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था और हाल ही में उसे एक साल की सजा भी सुनाई गई।
कोडाड के डीएसपी ने बताया कि सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी महिला भारती को मौत की सजा सुनाई है। पुलिस ने 10 गवाहों के बयान दर्ज किए, जिनमें बच्ची के चाचा और फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल थे। आरोपी भारती को अब हैदराबाद के चंचलगुडा महिला केंद्रीय कारागार में रखा गया है।
