
भावुक जज ने पढ़ी कविता- जो नारी का अपमान करे, क्या वो मर्द हो सकता है…
नर्मदापुरम। सिवनी मालवा में स्थानीय अदालत ने प्रदेश नर्मदापुरम जिले में एक मासूम बच्ची से दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने वाले दरिंदे को फांसी की सजा सुनाई है। कठोरतम दंड का ऐलान करते हुए जज ने एक भावुक कविता भी पढ़ी।
कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश मौखिक, दस्तावेजी साक्ष्य और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषी माना। सिवनी मालवा की प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश न्यायमूर्ति तबस्सुम खान ने इस सनसनीखेज दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी अजय धुर्वे (30) को फांसी की सजा सुनाई। वह दुष्कर्म और हत्या के अपराध के लिए पॉक्सो और कई धाराओं के तहत दोषी पाया गया। मौत की सजा के साथ ही उस पर 3000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। कोर्ट ने पीड़िता के माता-पिता को चार लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया।
बता दें इस साल जनवरी में एक छह साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। आरोपी ने मां के पास सो रही बच्ची को उठा लिया और फिर जंगल में ले जाकर उससे दुष्कर्म किया था। बाद में बच्ची की हत्या कर उसके शव को नहर किनारे फेंक दिया था। कोर्ट ने महज 88 दिनों के अंदर इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया है। सजा सुनाते हुए न्यायाधीश तबस्सुम खान ने दिल्ली के निर्भया कांड को याद करते हुए एक कविता भी सुनाई। उन्होंने कहा कि हां मैं हूं निर्भया, हां फिर एक निर्भया। एक छोटा सा प्रश्न उठा रही हूं। जो नारी का अपमान करे, क्या वो मर्द हो सकता है। क्या जो इंसाफ निर्भया को मिला, वह मुझे मिल सकता है?
