शहर की सुंदरता और सुरक्षा दोनों से हो रहा खिलवाड़

जबलपुर। विगत दिनों शहर में तेज हवाओं के बीच हुई बारिश के दौरान जहां एक और बिजली व्यवस्था छिन्न भिन्न हुई तो वहीं दूसरी ओर जगह-जगह लगे फ्लैक्स आड़े तिरछे हो गए| अभी तो गर्मी की शुरुआत में मौसम के मिजाज बिगड़े और यह हालात बने| मानूसनी सीजन में इस तरह की घटनाओं ने इस तरह के संकेत दे दिए है| मालवीय चौक, करमचंद चौक, नौदरा पुल, सहित अन्य व्यस्तम क्षेत्रों में नेताओं के शुभकामानाओं और कई व्यवसायिक फ्लैक्स , होर्डिंग्स रोड डिवाईडरों पर टंगे हुए हैं| ये विज्ञापन फलक न केवल शहर की सुंदरता को बिगाड़ रहे बल्कि दुर्घटनाओं का भी अंदेशा बना हुआ है| शुक्रवार की रात को बारिश और हवा के बीच गुरुनानक कन्या शाला माढ़ाताल के सामने एक होर्डिंग रोड डिवाइडर से उड़कर सड़क पर आ गया, जिससे लोग भयभीत हो गए| वहीं बारिश के दौरान बिजली गोल हो गई यह तो गनीमत रही कि होर्डिंग गिरने से कोई चपेट में नहीं आया वरना गंभीर हादसे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता था| बताया गया है कि क्षेत्रीय लोगों ने कई बार इन होर्डिंग्स को हटाने के लिए नगर निगम के संबंधित विभाग को शिकायत की, लेकिन राजनीतिक दलों के इन होर्डिंग्स हटाने में विभाग के पसीने छूट गए| अभी हाल ही में त्योहारों का सीजन चल रहा है कोई नवरात्र की बधाई तो कोई रामनवमी की शुभकामनाओं व बधाई के होर्डिंग्स लगा रहा है| हद तो यह हो गई कि बिजली के खंबों में होर्डिंग्स टांगे जा रहे है जिनसे हवा पानी के दौरान विद्युत अवरोध होने और दुर्घटनाओं का आंदेशा बना हुआ है| इस मामलें में अभी तक प्रशासन ने कोई संजीदगी नहीं दिखाई|
बिजली विभाग भी बेपरवाह………….
बिजली विभाग की भी हालात खराब है| पूरा काम आउटसोर्स कर्मचारियेां के माध्यम से चल रहा है| वरिष्ठ अधिकारियों को नियंत्रण भी समाप्त हो गया है| शाम 7 बजे के बाद सरकारी नंबर उठते ही नहीं है लोग शिकायत निराकरण के लिए परेशान होते है| जरा सा हवा पानी में विद्युत व्यवस्था छिन्न भिन्न हो जाती है| बिजली खंबो में झूल रहे तारों को व्यवस्थित करने की जहमत नहीं उठाई जा रही है| बड़े फाल्ट होने पर घंटो सुधार नहीं हो पाता| निजी घरेलू या व्यवसायिक कनेक्शनों में अवरोध आने पर 24 से 48 घंटों तक शिकायत अटेंड नहीं होती| राज्यस्तरीय कॉल सेंटर 1912 बार-बार रटा रटाया जवाब सुनाता है| आपकी शिकायत संबंधित अधिकारी तक भेज दी है जल्द ही आपकी शिकायत का समाधान होगा| दरअसल आउटसोर्स स्टॉफ में ठेकेदार की मनमानी चल रही है| पर्याप्त वाहन और संसाधन होने के बावजूद भी उनका उचित दोहन नहीं हो रहा| स्वीकृत से कम संख्या में स्टॉफ तैनात किया जाता है| जिससे लोगों को समय पर राहत नहीं मिल पाती
