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खुद नगरपालिका अध्यक्ष अपनी ही परिषद के अधिकारियों के खिलाफ बगावत पर उतर आए

शाजापुर। शहर के विकास का जिम्मा संभालने वाली शाजापुर नगरपालिका इन दिनों सियासी अखाड़े और भ्रष्टाचार के एक बड़े केंद्र में तब्दील हो चुकी है। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि यहां सिस्टम की नाकामी को लेकर सिर्फ विपक्ष ही हमलावर नहीं है, बल्कि खुद नगरपालिका अध्यक्ष अपनी ही परिषद के अधिकारियों के खिलाफ बगावत पर उतर आए हैं। कुत्तों की नसबंदी के नाम पर लाखों के वारे-न्यारे से लेकर करोड़ों के सीवरेज प्रोजेक्ट के डूबने तक, आरोप इतने गंभीर हैं कि अब यह प्रशासनिक विवाद एक बड़े राजनीतिक घमासान का रूप ले चुका है। अध्यक्ष और सीएमओ के बीच चल रही वर्चस्व की इस जंग के बीच रविवार को कांग्रेस ने भी प्रेस वार्ता कर इस भ्रष्टाचार के महाकुंभ की पोल खोल दी। कांग्रेस पार्षद दल के नेता प्रतिपक्ष अजीज मंसूरी ने नगर पालिका अध्यक्ष के वायरल वीडियो को ही ढाल बनाकर अफसरों पर तीखे तीर छोड़े। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि नगर पालिका में अब नियम-कानून का नहीं, बल्कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मनमानी का राज चल रहा है। भ्रष्टाचार की इंतहा तो यह है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर कोई जमीनी काम किए बिना ही, सिर्फ कागजों में 17 लाख रुपये डकार लिए गए। इतना ही नहीं, सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए नगर पालिका के वाहनों के मीटर तक बंद कर दिए गए हैं, ताकि हर महीने डीजल-पेट्रोल के नाम पर लाखों रुपये के फर्जी बिल पास कराए जा सकें। जनप्रतिनिधि बोर्ड निर्माण और वाहनों के बेजा इस्तेमाल को लेकर भी सिस्टम की बेशर्मी पूरी तरह उजागर हो चुकी है। मंसूरी ने कहा कि शहर के विकास की जो तस्वीरें कागजों पर रंगीन दिखाई जा रही हैं, वे जमीन पर उतनी ही बदरंग और खोखली हैं। वहीं पूर्व विधायक प्रतिनिधि आशुतोष शर्मा और कांग्रेस जिलाध्यक्ष नरेश्वरप्रताप सिंह ने करोड़ों रुपये की सीवरेज और नर्मदा जल योजना की पोल खोलकर रख दी। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि सीवरेज निर्माण में इतनी घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ है कि लाइनें जगह-जगह चोक पड़ी हैं। आज आधा शहर इस प्रशासनिक लापरवाही और बदहाली का खामियाजा भुगत रहा है। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर भी सिर्फ ठेकेदारों की जेबें भरी गई हैं। विपक्ष का सीधा आरोप है कि शिकायतों के अंबार लगे हैं, लेकिन ऊपर से नीचे तक बैठे जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।
सत्ता और विपक्ष के निशाने पर नपा प्रशासन
इस पूरी कहानी का सबसे हैरान करने वाला और स्याह पहलू नगर पालिका अध्यक्ष प्रेम जैन की वह पीड़ा है, जो अब खुलेआम छलक रही है। जो गंभीर आरोप विपक्ष लगा रहा है, कमोबेश वही दर्द खुद अध्यक्ष का भी है। अध्यक्ष ने सीएमओ भूपेंद्र दीक्षित के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए यहां तक कह दिया है कि ठेकेदारों और सप्लायरों के इस बेलगाम गठजोड़ ने शाजापुर को समस्याओं का सजापुर बनाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा शहर के विकास के लिए घोषित 10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की फाइल भी लालफीताशाही की भेंट चढ़ गई है। अध्यक्ष की बेबसी का आलम यह है कि अधिकारी उनकी बात तक सुनने को राजी नहीं हैं। शहर के बुनियादी काम स्ट्रीट लाइट, पार्कों का रखरखाव, चीलर नदी की जालियों की मरम्मत और नालियों की सफाई सब पूरी तरह ठप पड़े हैं। अफसर अपने अध्यक्ष को ही दरकिनार कर केवल कलेक्टर कार्यालय या बैठकों का बहाना बनाकर कुर्सी से नदारद रहते हैं। अब आजिज आ चुके नगर पालिका अध्यक्ष ने इस बेलगाम अफसरशाही की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री और स्थानीय सांसद-विधायक से करने का मन बना लिया है। सत्ता और विपक्ष, दोनों के ही निशाने पर अब नगर पालिका का यह भ्रष्ट तंत्र आ चुका है। लेकिन इस पूरी सियासी और प्रशासनिक नूराकुश्ती में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस जनता ने विकास की उम्मीद में वोट दिया था, उसके हिस्से में यह सजापुर क्यों आया? क्या शासन स्तर पर बैठे आका इस लूटतंत्र पर कोई सख्त कार्रवाई करेंगे, या शाजापुर की जनता यूं ही घोटालों की धूल फांकने को मजबूर रहेगी? प्रेसवार्ता के दौरान राजेश पारछे, सरदार मूसा आजम खान, सनी दुबे सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता मौजूद थे।

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