
बीते पांच सालों में 17,000 से अधिक कम हुए
नई दिल्ली । देश में सरकारी स्कूलों की संख्या में लगातार हो रही गिरावट गंभीर चिंता का विषय बन गई है। लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, बीते पांच सालों में 17,000 से अधिक सरकारी विद्यालय कम हुए हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा और उनकी पहुंच पर संभावित प्रभाव को लेकर नई बहस छिड़ी है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया के सवाल के जवाब में बताया कि जहां 2021-22 में देश में 10,22,386 सरकारी स्कूल थे, वहीं 2025-26 तक यह संख्या घटकर 10,05,245 रह गई। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि पांच वर्षों की इस अवधि में कुल 17,141 सरकारी स्कूल कम हुए हैं।
केंद्र सरकार ने स्पष्टीकरण दिया है कि स्कूलों को खोलने, बंद करने या उनका विलय करने का निर्णय राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों का है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का हवाला देकर कहा कि विलय सोच-समझकर किया जाए, ताकि बच्चों की पहुंच या पढ़ाई प्रभावित न हो। स्कूल कॉम्प्लेक्स या क्लस्टर बनाने का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग और शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाना है।
आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी स्कूलों की संख्या में सबसे बड़ी गिरावट जम्मू-कश्मीर में दर्ज की गई, जहां यह 23,173 से घटकर 18,787 हो गई। महाराष्ट्र, असम, हिमाचल, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे कई अन्य राज्यों में भी कमी आई है। वहीं, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात में सरकारी स्कूलों की संख्या में इसी अवधि में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है। लड़कियों की शिक्षा के संदर्भ में मिश्रित रुझान सामने आए हैं। कक्षा 3 से 8 तक में सकल नामांकन अनुपात में मामूली गिरावट आई है, जबकि कक्षा 9 से 12 के स्तर पर इसमें सुधार देखा गया। सरकार ने समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को नए स्कूल खोलने, बुनियादी ढांचे में सुधार, मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और ड्रॉपआउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए वित्तीय सहायता देने की बात कही है।
हालांकि, लोकसभा में पेश इन आंकड़ों से कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित हैं। केंद्र सरकार ने कुल स्कूलों की संख्या बता दी हैं, लेकिनद स्पष्ट नहीं किया कि कितने स्कूल वास्तव में बंद हुए, कितने का विलय हुआ या कितने नए खुले। यह भी साफ नहीं हुआ कि विलय हुए स्कूलों के कारण बच्चों को अधिक दूरी तय करनी पड़ी या नहीं, और इसका दाखिले या शिक्षा जारी रखने पर क्या असर पड़ा।
