
सुप्रीम कोर्ट ने 30 वर्ष पुराने विवाद का किया निराकरण
जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायाधीश विजय बिश्नोई की युगलपीठ ने जबलपुर के 30 वर्ष पुराने भूमि विवाद का निराकरण कर दिया। इसके अंतर्गत साफ किया कि पैतृक संपत्ति वह है जो पिता, दादा या परदादा से विरासत में मिली हो। देश की शीर्ष अदालत ने यह सिद्धांत भी प्रतिपादित किया कि नानी की संपत्ति पर को कोई जन्मजात अधिकार प्राप्त नहीं होता। लिहाजा, पिता को इसे बेचने या किसी को भी देने का पूर्ण कानूनी हक है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए जबलपुर निवासी रश्मि अवस्थी की अपील को निरस्त कर हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हमें इस मामले में ऐसा कोई आधार नहीं मिला, जिसके तहत हाई कोर्ट के पूर्व आदेश में हस्तक्षेप किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में हाई कोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी की थी कि जहां एक ओर बेटी रश्मि, उसके भाई राजेश और मां गीता कोर्ट में अपने हक की गुहार लगा रहे थे, वहीं दूसरी ओर अपील लंबित रहने के दौरान पिता की मृत्यु होते ही रश्मि ने अपनी मां और भाई के साथ मिलकर उसी विवादित जमीन के तीन हिस्से मेसर्स बालाजी गोल्डन टाउन, शकुन राय और शाहिदा नाज को गुपचुप तरीके बेच डाले, जो कि केवल खरीदार जबलपुर निवासी सुभाष चंद्र केसरवानी को उसके वास्तविक कानूनी हक से वंचित करने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश थीl
क्या था मामला …
1995 में दीक्षितपुरा निवासी योगेश कुमार अवस्थी ने रेंगवा आधारताल की बेशकीमती दो एकड़ जमीन को बेचने का सौदा सुभाष चंद्र केसरवानी के साथ किया था। लेकिन बाद में वे इस सौदे से मुकर गए तो से विवाद शुरू हो गया और मामला लोअर कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक गया। लेकिन हर स्तर पर फैसला खरीदार केसरवानी के पक्ष में हुआ। फिर जब ज़मीन पर कब्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तभी योगेश कुमार अवस्थी की बेटी रश्मि अवस्थी द्वारा जमीन पाने प्रयास प्रारंभ किया गया।
