देश में पंजीकृत करीब 30.4 करोड़ वाहनों में से लगभग 16.5 करोड़ वाहनों का बीमा नहीं

नई दिल्ली। अगर आपके वाहन का बीमा नहीं है तो आने वाले समय में मुश्किल बढ़ सकती है। देश में बड़ी संख्या में बिना बीमा वाले वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि बिना वैध बीमा वाले वाहनों की पहचान के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाए और जरूरत पड़ने पर ऐसे वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से भी रोका जा सकता है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि देश में पंजीकृत करीब 30.4 करोड़ वाहनों में से लगभग 16.5 करोड़ वाहनों का बीमा नहीं है। यानी करीब 56 फीसदी वाहन बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या दोपहिया वाहनों की है। बिना बीमा वाले वाहनों के कारण सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा हासिल करने में परेशानी होती है और उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य किया गया है, लेकिन इसका पालन नहीं होने से कानून का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। कोर्ट ने बीमा नियामक और सड़क परिवहन से जुड़े विभागों को एक पायलट योजना पर विचार करने को कहा है, जिसमें वाहन के बीमा स्टेटस को ईंधन उपलब्धता से जोड़ा जा सके। इस व्यवस्था के तहत बिना वैध बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से इनकार किया जा सकता है। इससे वाहन मालिकों को अपना बीमा समय पर अपडेट रखने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। संबंधित विभागों ने इस प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही है।
इसके अलावा, हाईवे और प्रमुख सड़कों पर लगे एएनपीआर कैमरों को बीमा डेटाबेस से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। इससे बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान अपने आप हो सकेगी और उनका ई-चालान भी जनरेट किया जा सकेगा। फिलहाल इन कैमरों का इस्तेमाल ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप और अन्य यातायात उल्लंघनों को पकड़ने के लिए किया जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि ट्रैफिक पुलिस को ऐसे डिजिटल उपकरण और मोबाइल एप उपलब्ध कराए जाएं, जिनसे मौके पर ही वाहन का बीमा स्टेटस जांचा जा सके। मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार बिना वैध थर्ड पार्टी बीमा के वाहन चलाने पर पहली बार पकड़े जाने पर तीन महीने तक की जेल या दो हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा उल्लंघन करने पर तीन महीने तक की जेल या चार हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। नए वाहनों के लिए भी बीमा नियमों में बदलाव किया गया है। अब नई कारों के लिए चार साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए छह साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य सड़कों पर बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या कम करना और दुर्घटना पीड़ितों को आर्थिक सुरक्षा देना है।
