भोपाल के अवैध निर्माण पर चला का चाबुक
मप्र उच्च न्यायलय द्वारा दिए गए सभी स्टे ऑर्डर को किया निरस्त……….प्रदेश सरकार द्वारा बनाई कमिटी को किया पावरलेस

नई दिल्ली/भोपाल । राजधानी में अवैध निर्माण को लेकर सर्वोच्च न्यायलय ने नियम विरुद्ध भू उपयोग एवं अवैध निर्माण को ले कर सक्त निर्देश जरी किये। बुधवार को भोपाल नगर निगम द्वारा दाखिल एक्शन टेकन रिपोर्ट पर चर्च हुई जिसमे नगर निगम की ओर से बताया गया की भोपाल में आवासीय परिसरों में एक हजार से जायदा अवैध निर्माण चिन्हित कर कार्यवाही की जा रही है 100 से ज्यादा भवनों को सील किया गया है, परन्तु उच्च न्यायलय की जबलपुर पीठ द्वार जारी स्टे ऑर्डर और राज्य सरकार के हस्ताक्षेप के बाद बनी 10 सदस्यों की कमेटी ने हमारे हाथ बांध दिए है और आगे की कार्यवाही अवरुद्ध हुई है इस पर न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और टिप्पणी करते हुए कहा की ये टकराव की स्तिथि निर्मित कर रहा है यहाँ सर्वोच्च न्यायलय के स्वत: संज्ञान का महतवपूर्ण विषय है इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप अस्वीकार किया जाता है जब इस प्रकरण में अमेकस क्युरी आदिवक्ता ए के सिन्हा ने बताया की नगर निगम निगम द्वारा बंद करवाए गए भवनों को पुन: खोल दिया गया है तो न्यायलय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल आदेश पारित किया और जबलपुर न्यायलय के द्वारा दिए गए अवैध भवनों पर कार्यवाही के स्टे ऑर्डर को तत्काल निरस्त किया साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा निर्मित जाँच समिति के हस्तक्षेप पर अंकुश लगा दिया। 15 सितंबर को अगली सुनवाई होगी 5 हफ्ते में न्यायलय के निर्देश अनुसार कार्यवाही कर नगर निगम भोपाल को अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है l
इस कार्यवाही पर अरेरा कॉलोनी के रहवासियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए न्यायलय का आभार माना साथ ही नगर निगम पर आरोप लगते हुए बताया की उनके द्वारा न्यायलय में असत्य रिपोर्ट प्रस्तुत की गई जिसमे कहा गया है की 100 इमारतों को सील किया गया था परन्तु सील हुई भवनों की संख्या कम है l
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा की अवैध निर्माण के चलते अरेरा कॉलोनी के रहवासियों का जीवन दुश्वार हो गया है यहाँ भूमाफियाओ के लालच के चलते आम आदमी का सडक पर चलना मुश्किल हो गया है अवैध इमारतों ने सड़को के फुटपाथ तक निगल लिए है इनके पास खुद की कोई पार्किंग न होने के कारण कॉलोनी के अन्दर तक जाम की हालत निर्मित होती है l
