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रियल स्टेट कंपनी घोटाले से जुड़ा मामला
जयपुर। राजस्थान की राजनीति में मंगलवार सुबह हलचल उस वक्त तेज हो गई जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज्य के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके 19 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। सुबह करीब 5 बजे जयपुर और प्रदेश के अन्य हिस्सों में ईडी की टीमें पहुंचीं। यह कार्रवाई रियल एस्टेट कंपनी पीएसीएल के 48 हजार करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है।
सूत्रों से प्राप्त हो रही जानकारी अनुसार, पीएसीएल घोटाले में प्रताप सिंह खाचरियावास और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के नाम पर अवैध धन ट्रांसफर हुआ था। ईडी को संदेह है कि यह पैसा प्रॉपर्टी और अन्य सेक्टर्स में निवेश कर दिया गया। इसी संबंध में एजेंसी ने मंगलवार सुबह यह छापेमारी की है।
छापेमारी की खबर फैलते ही समर्थक जुटे
ईडी की छापामार कार्रवाई की खबर जैसे ही फैली, खाचरियावास के जयपुर स्थित सिविल लाइंस आवास पर उनके समर्थक जुटने लगे। यहां कुच्छ ने ईडी की कार्रवाई का विरोध भी किया। मौके पर भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई। कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।
क्या है पीएसीएल घोटाला
पीएसीएल कंपनी पर लाखों लोगों से निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप है। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी। सेबी के अनुसार, पीएसीएल की 1.86 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है, जो निवेशकों की राशि से चार गुना अधिक है। सेबी ने 22 अगस्त 2014 को पीएसीएल की सभी योजनाओं को अवैध घोषित करते हुए कंपनी के कामकाज पर रोक लगा दी थी। इसके बाद कंपनी और सेबी के बीच मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसमें सेबी को जीत मिली।

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