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नई दिल्ली। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल की हवा खा चुके तमिलनाडु के मंत्री सेंथल बालाजी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट मनी लॉन्ड्रिंग केस में सेंथिल बालाजी को दी गई जमानत को वापस लेने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन पर जमानत की शर्तों को तोड़ने का आरोप है। इस पर कोर्ट ने साफ कर दिया कि जमानत पर बाहर रहना है तो मंत्री पद छोड़ना होगा।
न्यायमूर्ति अभय ओका की बेंच ने साफ कह दिया कि अगर जमानत पर बाहर रहना है तो मंत्री पद छोड़ना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सेंथिल बालाजी से कहा, हम इस आचरण को बर्दाश्त नहीं करेंगे! हम आपको एक विकल्प दे रहे हैं–आजादी या मंत्रिमंडल का पद? सेंथिल बालाजी ने सुप्रीम कोर्ट के टफ स्‍टैंड को देखते हुए कहा कि वह सोमवार तक अपना निर्णय लेंगे और सुप्रीम कोर्ट को सूचित करेंगे कि क्या वह मंत्री पद पर बने रहेंगे या नही? यह मामला तमिलनाडु में कथित नौकरी के बदले नकद घोटाले से जुड़ा है। न्यायमूर्ति अभय ओका ने सेंथिल बालाजी को फटकार लगाते हुए कहा कि जमानत देने का मतलब यह नहीं कि आपको पद पर बने रहने की शक्ति भी दी गई है, जिससे आप पीड़ितों को प्रभावित करें!
न्यायमूर्ति ओका ने सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी से कहा, जब वह मंत्री थे तब उनके द्वारा समझौता कराने के तरीके पर स्पष्ट टिप्पणियां दर्ज की गई थीं। हमने उन्हें वह अधिकार नहीं दिया कि वह सत्ता में लौटकर गवाहों को प्रभावित करें।”सुप्रीम कोर्ट ने सेंथिल बालाजी से कहा, “आपका पिछला आचरण दर्शाता है कि आपने गवाहों को प्रभावित किया है और अब आप फिर से मंत्री बन गए हैं! सेंथिल बालाजी साल 2011-2016 के दौरान परिवहन मंत्री थे। तब कैश-फॉर-जॉब घोटाला सामने आया था। आरोप है कि उन्‍होंने नौकरी के बदले रिश्वत ली। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने इस मामले में जून 2023 में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत उन्हें गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने उन्‍हें सितंबर 2024 में 15 महीने की हिरासत और ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत दी, लेकिन कठोर शर्तें लगाईं।

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