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ईओडब्ल्यू ने दो महिला समेत तीन के खिलाफ दर्ज की एफआईआर
भोपाल। आधार रियल्टी फर्म द्वारा नगर निगम के पक्ष में बंधक रखी गई जमीन को आधार रियल्टी फर्म द्वारा हेराफेरी कर बेचने की शिकायत पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने जॉच के बाद दो महिलाओ सहित तीन लोगो के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल द्वारा की गई जांच में यह भी सामने आया कि आधार रियल्टी फर्म के संचालकों ने नगर निगम कोलार, भोपाल के पक्ष में बंधक रखे गए फ्लैट्स को बिना अनुमति के बेच दिया। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। ईओडब्ल्यू की और से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता आशीष श्रीवास्तव ने प्रकोष्ठ में शिकायत की थी, कि आधार रियल्टी फर्म ने आधार सिम्फनी नामक आवासीय परियोजना में नगर निगम के लिए सुरक्षित रखे गए फ्लैट्स को नियमों का उल्लंघन करते हुए बेचा है। इस फर्म का गठन दिलीप बच्चानी, हर्षिता बच्चानी और आशीष श्रीवास्तव ने साल 2011 में किया था। परियोजना के लिए मंजूर विकास अनुमति में यह शर्त रखी गई थी, कि कुल फ्लैट्स का 25 प्रतिशत हिस्सा नगर निगम के पक्ष में बंधक रखा जाएगा। ताकि भविष्य में कॉलोनी के विकास और ईडब्ल्यूएस/एलआईजी (आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग) के लिए फ्लैट्स का निर्माण सुनिश्चित हो सके। 25 जनवरी 20214 के बंधक पत्र के तहत कुल 47 फ्लैट्स नगर निगम के पक्ष में वैध रूप से बंधक किए गए थे। बाद में 24 अक्टूबर 2017 को संशोधित बंधक डीड निष्पादित कर कुछ प्रकोष्ठों में परिवर्तन कर 45 फ्लैट्स को बंधक बनाए रखा गया था। फर्म द्वारा प्रथम चरण में 115 फ्लैट्स का निर्माण कर विक्रय कर दिया गया, जबकि शेष भूमि (लगभग 1 एकड़) द्वितीय चरण हेतु सुरक्षित थी,जिसमें बंधक फ्लैट्स भी प्रस्तावित थे। इन बंधक फ्लैट्स को नगर निगम की पूर्व अनुमति के बिना 10 नवंबर 2022 को प्रिया हरपलानी को बेच दिया गया। विक्रय पत्र में गलत जानकारी दी गई कि संपत्ति किसी भी बंधक से मुक्त है, जबकि जमीन पहले से ही नगर निगम के पक्ष में बंधक थी। जांच में यह भी सामने आया कि क्रेता प्रिया हरपलानी को भूमि की बंधक स्थिति की जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद सौदा किया गया। इससे साफ है, कि दोनों पक्षों ने मिलकर जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया। इतना ही नहीं, परियोजना में गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए जो फ्लैट्स बनाने थे, उनका भी निर्माण नहीं किया गया। सभी फ्लैट्स सामान्य बाजार दर पर बेच दिए गए, जिससे शासन की सामाजिक योजना और गरीबों के लिए आवासीय सुविधा प्रभावित हुई। नगर निगम भोपाल ने जानकारी देते हुए साफ किया गया कि फर्म ने बंधक भूमि के विक्रय के लिए कोई अनुमति नहीं ली थी। इस प्रकार, बिना अनुमति के बंधक संपत्ति का विक्रय कर नगर निगम और शासन के अधिकारों को नुकसान पहुँचाया गया। जांच के आधार पर दिलीप बच्चानी, हर्षिता बच्चानी और प्रिया हरपलानी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

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