
दुनिया की सबसे कम उम्र की संथारा धारण करने वाली इस मासूम को था ब्रेन ट्यूमर
इन्दौर। मात्र 3 वर्ष 4 माह और 1 दिन की आयु की बच्ची द्वारा संथारा लेने का मामला सामने आया है। ब्रेन ट्यूमर से जूझ रही इंदौर के जैन परिवार की इस मासूम बच्ची ने संथारा लेने के 10 मिनिट बाद ही प्राण त्याग दिए। मामला 21 मार्च का है और बच्ची का नाम वियाना तथा उनके माता-पिता का नाम वर्षा और पीयूष है ये दोनों आईटी प्रोफेशनल है और इन्हें वियाना के ब्रेन ट्यूमर का पता जनवरी में चला था उसके बाद पहले इन्दौर फिर मुम्बई में वियाना की सर्जरी कराई गई थी लेकिन कुछ खास फर्क नहीं पड़ने के बाद उन्होंने वियाना के संथारा का यह निर्णय लिया। वियाना के इस संथारा को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अद्वितीय उपलब्धि के रूप में दर्ज किया गया है और गत बुधवार को कीमती गार्डन में आयोजित एक भावनात्मक आयोजन में वियाना के माता-पिता को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने अवॉर्ड दिया गया। वियाना के माता-पिता पीयूष जैन एवं वर्षा जैन के अनुसार मुंबई में ऑपरेशन के बाद भी जब वियाना की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो 21 मार्च को वे वियाना को लेकर राजेश मुनि महाराज के पास गए थे। उन्होंने कहा- इसका एक रात गुजारना भी मुश्किल है। संथारा करा देना चाहिए। हमने वहीं विचार कर परिवार के लोगों से सहमति ली और फिर हमने अपनी नन्ही इकलौती बेटी को संथारा ग्रहण कराने की मंशा जताते उसी दिन संथारा दिलाने के लिए स्वीकृति दे दी। हमारी सहमति के बाद मुनिश्री ने मंत्रोच्चार, विधि विधान के साथ संथारा की प्रक्रिया शुरू की। संथारा का यह विधान आधे घंटे तक चला। फिर इसके 10 मिनट बाद ही नन्हीं बेटी ने अपने प्राण त्याग दिए। एक तरफ हमें आत्म संतोष था तो दूसरी तरफ इकलौती मासूम के बिछोह की पीड़ा। बता दें कि जैन समाज में संथारा का बहुत महत्व होता है।
