यह बहुत वास्तविक रिजल्ट है – अब वार्षिक परीक्षा एक बार नहीं होगी, बल्कि साल में दो बार होगी

दमोह। सबसे अच्छी बात यह है कि जिले के कई विद्यार्थी प्रावीण्य सूची में आए है, जिन्होंने दमोह जिले का नाम रोशन किया है। कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने उन विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनायें दी। उन्होंने कहा पिछली बार से हमारा रिजल्ट सुधरा है, लेकिन निराशाजनक स्थिति यह है, कि पिछली बार की तरह ही सबसे निचली पायदान पर है। इस संबंध में कलेक्टर श्री कोचर ने 2-3 बातें सभी से कहीं है, पहली बात कि पिछले दो वर्षों में नकल पर बहुत सख्ती से लगाम लगाई है और उसमें बहुत ज्यादा सख्ती हुई है, इस कारण से परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई है, जो रिजल्ट आया है, सामने है वह बहुत वास्तविक रिजल्ट है।
कलेक्टर श्री कोचर ने कहा हमें यह समझना होगा हमारे बच्चों का अभी वर्तमान में स्तर क्या है, अब इस शिक्षा स्तर को ऊपर उठाके लेकर जाना है, यह एक चुनौती है। दूसरी बात महत्वपूर्ण है, की अभी तक जो फोकस होता है, वह फोकस हमेशा यह होता है, की 10 वीं और 12वीं को देखते हैं, यह 10 वीं और 12 वीं के रिजल्ट सभी जगह फ्लैश होते हैं, लेकिन 1 से 8 वीं को बिल्कुल भूल जाते हैं, जो बच्चे की नींव पड़ती है, पढ़ाई की वह 1 से 8 वीं तक की पड़ती है। अब यदि 1 से 8 वीं में उन विद्यार्थियों की नीव अच्छी नहीं है, उसके बेसिक कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं है, तो 9 वीं, 10 वीं, 11 वीं, 12 वीं में फिर नकल का सहारा लेना पड़ता है, या फिर वह अनुत्तीर्ण होते है, तो ऐसी स्थितियों से बचने के लिए शुरुआत में कक्षा 1 से बल्कि प्री प्राइमरी से ध्यान देने की जरूरत पड़ेगी, जब वहाँ से विद्यार्थियों पर ध्यान देने की कोशिश करेंगे, उसके बाद जो जनरेशन निकल के आएंगी वह जनरेशन फिर आपको रिजल्ट देना शुरू करेंगे।
कलेक्टर श्री कोचर ने कहा जिले के रिजल्ट में रातो-रात सुधार नहीं हो सकता है, यह कड़ी मशक्कत का काम है, और कम से कम 4 से 5 साल लेगा तब जाकर के इसके परिणाम देखने के लिए मिलेंगे। इसके लिए तैयारी शुरू करना पड़ेगी अभी हम ये तैयारी कर रहे हैं, की अगले एक से डेढ़ महीने में जब 15 जून से स्कूल खुलेंगे तो सबसे पहले फोकस आंगनवाड़ियों के ऊपर है, जहाँ पर प्री प्राइमरी स्कूल सभी जगह फंक्शनल बहुत अच्छे तरीके से हो जायें इसके लिए 13 से 16 के बीच में आंगनवाड़ी, महिला बाल विकास और स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक रखी है और इसकी एक कार्य योजना बना रहे है। इसके साथ ही फिर 1 से 5 वीं और 8 वीं यह तीन क्लासेज ऐसी है, जो की बहुत इम्पोर्टेन्ट जंक्शन होते है, बच्चों की लाइफ में तो इन तीनों क्लासेज में सरकार ने नियम बना रखा है, जैसे एक क्लास का नियम बताऊँ की 1 क्लास में बच्चे को एक से 99 तक की गिनती आनी चाहिए। दूसरी चीज़ उन्होंने बताई कि 30 शब्द प्रति मिनट उसको पढ़ते बनना चाहिए और तीसरी चीज़ बहुत सामान्य से जोड़ करते आना चाहिए जैसे पांच और चार कितने होते है नौ एक अंकों का जोड़ करते आना चाहिए अब यह देखना पड़ेगा कि एक क्लास में जब बच्चा पास होकर के निकलता है, तो उसके अंदर ये बेसिक स्किल्स आये की नहीं आये ऐसा हर क्लास के लिए करते जाना पड़ेगा जब हम यह कर पाएंगे तभी जा करके हम आगे की कक्षाओं में अपने बच्चों को सक्षम बना पाएंगे, इसके लिए ध्यान देने की बहुत ज्यादा जरूरत है। जिस पर काम करना शुरू कर रहे हैं।
उन्होंने कहा दो और सेक्शन चिहित किए हैं, प्रबल और प्रखर जो बच्चे इस साल 9 वीं से 10 वीं में गए है, और जिनके 85% से ज्यादा मार्क्स है, उनको पहले दिन से उनके व्हाट्सएप ग्रुप बना दिए है, अभी और उनको शुरुआत से अपनी रडार पर रख रहे है, ताकि उन बच्चों के रिजल्ट और बेहतर 90% से ऊपर आए इसके लिए पहले दिन से उनकी तैयारी कराएँगे। इसी प्रकार दूसरा ग्रुप बनाया प्रबल ग्रुप, जिसमें कमजोर बच्चे है, जो की 33% 45% 50% तक मार्क लेकर के आते हैं, या जो अनुत्तीर्ण होते हैं, इन बच्चों का ग्रुप बना करके इनको शुरू से अलग तरह की तैयारी कराएँगे तो दोनों की अलग-अलग तरीके से तैयारी कराने का काम करेंगे। लास्ट पॉइंट सबसे इम्पोर्टेन्ट है, इस बार से माध्यमिक शिक्षा मंडल ने व्यवस्था को परिवर्तित किया है, और अब वार्षिक परीक्षा एक बार नहीं होगी, बल्कि साल में दो बार होगी और पहले ये व्यवस्था थी कि एक बार वार्षिक परीक्षा होती थी और दूसरी बार सप्लीमेंटरी एग्जाम होती थी तो सप्लीमेंटरी एग्जाम बहुत लाइट्ली लेते थे, लेकिन इस बार व्यवस्थाएँ बदल गई हैं।
