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सरकार,आध्यात्म-धर्मस्व विभाग को नोटिस, 4 हफ्ते में मांगा जवाब, अगली सुनवाई 24 जून को

जबलपुर। प्रदेश में मंदिरों और धार्मिक स्थानों पर सिर्फ ब्राह्मण पुजारी नियुक्त करने के एमपी सरकार के फैसले को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और प्रदेश के अध्यात्म, धर्मस्व विभाग को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 4 हफ्तों में जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं पुष्पेंद्र शाह ने कोर्ट से मध्यप्रदेश विनिर्दिष्ट मंदिर विधेयक 2019 को असंवैधानिक ठहराने की मांग की है। इसके अनुसार एमपी सरकार ने प्रदेश के 350 से ज्यादा मंदिरों को अधिसूचित कर अपने अधीन रखा है। मंदिरों में अध्यात्म विभाग सिर्फ ब्राह्मणों को ही पुजारी के पद पर सवैतनिक नियुक्ति दे रहा है। जबकि ये संविधान की मंशा के खिलाफ है। याचिका में जाति वर्ग नहीं योग्यता देखकर पुजारियों की नियुक्तियों की मांग की गई है। कहा गया है कि प्रदेश के तमाम धार्मिक स्थलों पर सभी वर्गों के योग्य लोगों को पुजारी पद पर नियुक्ति मिलनी चाहिए। एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर का कहना है “पुजारी पद पर केवल ब्राह्मणों की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14,15,16 तथा 21 से का उल्लंघन करती है। इसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार देने की बात कही गई है। इसलिए इस पॉलिसी को निरस्त किया जाना चाहिए। ठाकुर ने कोर्ट को यह भी बताया “हिंदू समुदाय में OBC/SC/ST वर्ग भी शामिल हैं। ऐसे में हिन्दू संप्रदाय की केवल एक जाति को ही पुजारी नियुक्त करना भारतीय संविधान से असंगत है।

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