
जबलपुर में जनसंगठनों ने प्रदर्शन कर जताया आक्रोश
जबलपुर। भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की नीति मध्यप्रदेश में फेल है क्योंकि प्रदेश में पिछले 9 वर्षो से लोकायुक्त की रिपोर्ट विधानसभा में रखी ही नहीं गई है|
मंत्री, विधायक तथा अधिकारी आदि लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच कर लोकायुक्त संस्था सरकार को कार्रवाई करने की अनुशंसाएं करती है| यह अनुशंसाएं तथा उन पर की गई कार्रवाई विधानसभा पटल पर प्रत्येक वर्ष रखे जाने का प्रावधान है| किन्तु प्रदेश सरकार ने पिछले 9 वर्षों से इस अनिवार्य प्रावधान की अनदेखी की तथा जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी मिलने से वंचित कर दिया है|
इस पर आक्रोश जताते हुए गुरुवार को विभिन्न जनसंगठनों ने घंटाघर के पास एकत्रित होकर प्रदर्शन किया| उन्होंने जिला प्रशासन के माध्यम से मध्यप्रदेश के राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप करने का निवेदन किया|
आरोपियों को बचाने की कोशिश………
संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार ने लोकायुक्त में दर्ज प्रकरणों में से 284 तथा ईओडब्ल्यू के प्रकरणों में से 30 में अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी है, क्योंकि इन प्रकरणों में मंत्रियों तथा बड़े अधिकारियों पर दर्ज मामलें भी शामिल है| सरकार ऐसे आरोपी मंत्री तथा अधिकारियों को बचाना चाहती है|
