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मुंबई। अंडरवर्ल्ड डान अरुण गवली को 2008 के जबरन वसूली मामले में बरी कर दिया गया है। सरकारी पक्ष गवली के खिलाफ आरोप साबित करने में असमर्थ रहा, उसे विशेष मकोका अदालत ने बरी कर दिया, लेकिन अरुण गवली फ़िलहाल जेल में ही रहेगा। दरअसल अरुण गवली शिवसेना के नगरसेवक कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के मामले में सजा काट रहा है। शिवसेना नेता कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुख्यात गैंगस्टर अरुण गवली को विशेष मकोका अदालत ने 2008 के जबरन वसूली मामले में बरी कर दिया। हालाँकि, अरुण गवली कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के मामले में नागपुर सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। इसलिए, भले ही जबरन वसूली के मामले में उसे बरी कर दिया गया हो, फिर भी गवली को जेल में ही रहना होगा। मुंबई की विशेष मकोका अदालत ने जबरन वसूली के मामले में अरुण गवली, उसके छोटे भाई विजय अहीर और टीम के पांच सदस्यों को भी बरी कर दिया। इस मामले में कुल नौ आरोपी शामिल थे। हालाँकि, उनमें से एक की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि दूसरा निर्दोष साबित होने वाला गवाह बन गया। महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (एमओसीसीए) के तहत गठित विशेष अदालत के न्यायाधीश बी.डी. शेल्के ने कहा कि सरकारी पक्ष अरुण गवली और अन्य आरोपियों के खिलाफ जबरन वसूली का आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। इसलिए उन्होंने अभियुक्त को बरी करने का आदेश दिया। अदालत ने आदेश में यह भी कहा कि गवली और अन्य आरोपियों को अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए, अरुण गवली और अन्य आरोपियों को जबरन वसूली के मामले में बरी कर दिया गया। हालाँकि, जामसांडेकर हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद गवली को अपना बाकी जीवन जेल में ही बिताना होगा।

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