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बस छोड़ने के लिए 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी

इन्दौर । विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार अधिनियम) धर्मेंद्र सोनी की कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक लोकायुक्त पुलिस आशीष खरे ने 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगने वाले भंवरकुआ थाने के कांस्टेबल राहुल सिंह रघुवंशी व अंकुश दांगी के खिलाफ चालान पेश किया। इन दोनों कांस्टेबलों ने एक यात्री बस रोकी और यात्रियों को उतारकर बस थाने लाकर बस छोड़ने के एवज में बस मालिक से 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। हालांकि जब बस मालिक रिश्वत की राशि लेकर थाने पहुंचा तो लोकायुक्त पुलिस के हाथों पकड़े जाने की भनक लगने पर दोनों आरोपी कांस्टेबल वहां से गायब हो गए थे। प्रकरण में विवेचना उपरांत लोकायुक्त ने अब चालान कोर्ट में पेश किया। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि आरोपी बस मालिक रामकुमार शर्मा, निवासी देवास ने 1 मार्च 2021 को शिकायत की थी कि वह उज्जैनी मोटर्स प्रायवेट लिमिटेड देवास के नाम से यात्री बसों का संचालन करता है। उसकी यात्री बस तीन इमली बस स्टेण्ड इंदौर से ब्यावरा यात्रियों को लेकर जा रही थी तभी थाना भंवरकुआं के आरक्षक द्वारा बस को रोककर उसमें बैठे यात्रियों को सड़क पर उतार दिया था और बस को थाने के बाहर खड़ा कर बस की चाबी थाने में रखते हुए बस के चालक व परिचालक को भी थाने पर बैठा लिया। सूचना पर जब वह थाना भंवरकुआं पहुंचा तो थाना परिसर में आरक्षक राहुल रघुवंशी मिला और राहुल रघुवंशी ने बस छोड़ने के लिए 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। जिसकी शिकायत लोकायुक्त को की गई। लोकायुक्त पुलिस द्वारा फरियादी से फोन पर बात करा दोनों कांस्टेबल के रिश्वत की मांग की बात रिकार्ड की गई। रिश्वत मांगने की पुष्टि पश्चात भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7 एवं 120 (बी), भादवि के तहत अपराध दर्ज कर दोनों कांस्टेबलों को रंगेहाथ पकड़ने की योजना बनाई गई। जिसके चलते फरियादी बस मालिक को आरोपी आरक्षकों को रिश्वत राशि देने हेतु थाने पर भेजा गया किंतु थाने पर दोनों आरोपी कांस्टेबल नहीं मिले। इस पर फरियादी ने आरोपियों को फोन लगाया परंतु उनके मोबाईल स्विच ऑफ पाए गए। इस कारण रिश्वत का लेनदेन नहीं हो पाया था। इसी प्रकरण में विवेचना उपरांत लोकायुक्त ने चालान कोर्ट में पेश किया।

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