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भोपाल। व्यापमं घोटाले की जांच कर रही विशेष सीबीआई अदालत ने प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी)-2009 में फर्जी परीक्षार्थियों को बैठाने के मामले में 10 आरोपियों को तीन-तीन साल की सश्रम कैद और 15-15 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश (सीबीआई व्यापमं प्रकरण) सचिन कुमार घोष की अदालत ने शनिवार को सुनाया।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि 5 अभ्यर्थियों—विकास सिंह, दिलीप सिंह, कपिल पर्ते, प्रवीण कुमार और नागेंद्र कुमार—ने अपनी जगह अवधेश कुमार, प्रीतेश सिंह, शिवकरण साहू, सतेंद्र सिंह और रमेश कुमार को परीक्षा में बैठाया। इन फर्जी परीक्षार्थियों ने असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देकर उसे पास भी कर लिया। जांच में पाया गया था कि आरोपियों ने ऑनलाइन आवेदन पत्र में फोटो एडिटिंग के ज़रिए अपनी असली फोटो की जगह फर्जी परीक्षार्थियों की फोटो मिलाकर अपलोड की थी। अदालत में पेश विशेषज्ञ रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि एडमिट कार्ड में प्रयुक्त तस्वीरें दो अलग-अलग व्यक्तियों की थीं और उन्हें मिलाकर छेड़छाड़ की गई थी।
13 आरोपियों में से दो की मौत
इस मामले में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से नागेंद्र सिंह और रवि सोलंकी की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई। एक अन्य आरोपी ज्ञानेंद्र को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। बाकी 10 को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई है।
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर की थी जांच
इस प्रकरण की शुरुआत भोपाल के कोहेफिजा थाने में एक शिकायत से हुई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई थी। सीबीआई ने सबूत जुटाकर चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर यह फैसला सुनाया गया।

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