शासन और डीजीपी से चार सप्ताह में मांगा जवाब


इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की एकल पीठ ने पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी सीधी भर्ती वर्ष 2015 के सब इंस्पेक्टर को इंस्पेक्टर के पद का प्रभार दिए जाने के आदेश और प्रकिया पर मामले के निराकरण होने तक रोक लगा शासन और डीजीपी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। पुलिस मुख्यालय द्वारा 6 मई 2025 को सीधी भर्ती वर्ष 2015 के एसआई को उच्च पद का कार्य भार दिए जाने के संबंध में कार्यवाही किए जाने के लिए पत्र जारी किया था। इस पत्र में पदोन्नत एसआई की अपेक्षा की गई है। इससे व्यथित होकर पदोन्नति के पात्र एसआई ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करते कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट के आदेश को एक साल से अधिक हो जाने के बाद भी पुलिस मुख्यालय ने उसका पालन नहीं किया था जिसके चलते पदोन्नति के एसआई ने पहले अवहेलना याचिका दायर की जिसके बाद पुलिस मुख्यालय द्वारा त्रुटिपूर्ण तरीके से की गई कार्यवाही को जारी रखते हुए उसी अनुसार अन्य आदेश भी जारी कर दिए गए । याचिका पर सुनवाई करते कोर्ट ने 6 मई 2025 को पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश पर लगी पिटीशन के चलते अंतिम निराकरण होने तक आदेश पर रोक लगा दी। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि पुलिस मुख्यालय ने 2021 में उच्च पद का कार्य भार दिए जाने के संबंध में प्रक्रिया प्रारंभ कर सब इंस्पेक्टर को इंस्पेक्टर पद पर कार्यभार का आदेश जारी किया गया था। उक्त आदेश और वरिष्ठता सूची 2020 मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम, 1961 के नियम 8,10,12 तथा मध्य प्रदेश पुलिस नियम, 1997 के विपरीत होने से कोर्ट में पुलिस मुख्यालय के आदेश के विरुद्ध पदोन्नति के लिए एक एसआई ने पिटीशन दायर की थी। 29 फरवरी 2024 को कोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश पारित किया था कि पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश कानून की दृष्टि में मान्य नहीं किया जा सकता है। इसके साथ 2021 का आदेश निरस्त कर दिया गया था। वरिष्ठता सूची को नियम अनुसार 3 माह में फिर जारी करने का आदेश शासन को दिया था। याचिका में बताया गया था कि परिवीक्षा अवधि 2 वर्ष समाप्ति दिनांक से सीधी भर्ती के एसआई को वरिष्ठता दिए जाने का प्रावधान है। परन्तु इसके विपरीत पुलिस मुख्यालय ने परिवीक्षा अवधि को भी वरिष्ठता में जोड़ दिया जिससे पदोन्नति के एसआई वरिष्ठता में सीधी भर्ती से पीछे हो गए थे। और उन्होंने कोर्ट में इस आदेश को चुनौती देते याचिका दायर की जहां से आदेश पर रोक लगा शासन और डीजीपी से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।
