आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें
(अनुराग हजारी)


भोपाल ! मंत्री होकर किस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हो..यह कहते हुए मंत्री विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई एफआईआर पर रोक से किया इंकार कर दिया है था वहीं मंत्री विजय शाह पर एफ आई आर की भाषा से नाराज हाईकोर्ट ने कहा कि अब पुलिस की जांच हमारी निगरानी में होगी!
अपने बयान को लेकर विवादों में घिरे मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह को न्यायालय से भी किसी तरह की राहत मिलती नजर नहीं आ रही है एक ओर जहां उनके बयान को लेकर हाईकोर्ट नाराज है तो वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया था सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वह विजय शाह के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर रोक नहीं लगाएगा। मंत्री शाह ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अब मंत्री के ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है जिसके और एफ आई आर दर्ज होने के बाद से ही मंत्री लुकते छिपते फिर रहे हैं ना पुलिस को उनका पता है ना सरकार को उनका पता है वही लगातार उनका मोबाइल भी बंद जा रहा है मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह को कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त फटकार लगाते हुए एफआईआर पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। सीजेआई बीआर गवई की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, कि आप मंत्री हैं, आपकी भाषा मंत्री जैसी होनी चाहिए। क्या इस तरह की टिप्पणी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को शोभा देती है?
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस स्तर के नेताओं से ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की जाती, खासकर तब जब देश संवेदनशील हालातों से गुजर रहा हो। मामले की सुनवाई के दौरान विजय शाह के वकील ने दलील दी कि मंत्री ने मीडिया द्वारा तोड़-मरोड़कर पेश किए गए बयान पर माफी मांग ली है। उनका कहना था कि हाईकोर्ट ने उन्हें सुने बिना ही आदेश पारित कर दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा, आप हाईकोर्ट के पास क्यों नहीं गए? 24 घंटे में कुछ नहीं बिगड़ेगा। हम कल फिर सुनवाई करेंगे।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद एक जनसभा में विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम लेकर विवादित टिप्पणी की थी, जिसके बाद मामला गरमा गया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया, जिसके तहत महू के मानपुर थाने में भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 152, 196(1)(बी) और 197(1)(सी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
एफआईआर ऐसे कंटेंट के साथ लिखी गयी है,जो चुनौती देने पर निरस्त हो जाये
महिला सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर मंत्री विजय शाह के विवादित बयान पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी। साथ ही एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। मंत्री विजय शाह के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ में गुरुवार को फिर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के आदेशानुसार मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं किये जाने पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की है। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा है कि एफआईआर ऐसे कंटेंट के साथ लिखी गयी है,जो चुनौती देने पर निरस्त हो जाये। युगलपीठ ने आदेश में उल्लेखित कंटेंट के बारे बताते हुए एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा है। इसके अलावा एफआईआर में पुलिस विवेचना की मॉनिटरिंग हाईकोर्ट द्वारा की जायेगी।
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि यह उल्लेख करना आवश्यक है कि कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ, मीडिया और राष्ट्र को पाकिस्तान के खिलाफ हमारे सशस्त्र बलों द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर की प्रगति के बारे में जानकारी देने वाले सशस्त्र बलों का चेहरा थीं। मंत्री ने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, जो किसी और के लिए नहीं बल्कि उनके लिए ही हो सकती है। सार्वजनिक समारोह में उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को पहलगाम में 26 निर्दाेष भारतीयों की हत्या करने वाले आतंकवादियों की बहन बताया है। अखबारों की रिपोर्ट और इंटरनेट पर उपलब्ध डिजिटल सामग्री मे उपलब्ध मंत्री के भाषण उपलब्ध है। जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आतंकवादियों की बहन को उन्हें सुलझाने के लिए भेजने की बात कही है। उनकी यह टिप्पणी संबंधित अधिकारी के लिए बल्कि सशस्त्र बलों के लिए भी अपमानजनक और खतरनाक है।बयान प्रथम दृष्टया मुस्लिम धर्म के सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के बीच वैमनस्य और दुश्मनी या घृणा या दुर्भावना पैदा करने की प्रवृत्ति वाला है !
इसके पहले हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए मंत्री के खिलाफ बीएनएस की धारा 152, 196(1)(बी) और 197(1)(सी) के अंतर्गत तत्काल एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किये थे। आदेश ये भी कहा गया था कि प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह ने सोमवार को महू के अंबेडकर नगर के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक समारोह में भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया है। सशस्त्र सेना देश में मौजूद आखिरी संस्था है, जो ईमानदारी, उद्योग, अनुशासन, त्याग, नि:स्वार्थता, चरित्र, सम्मान और अदम्य साहस को दर्शाती है। देश का कोई भी नागरिक खुद उन्हें पहचान सकता है। मंत्री विजय शाह ने आमसभा में कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ गटर भाषा का इस्तेमाल किया है।
गुरुवार को युगलपीठ के आदेश से पहले सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने पीठ को बताया कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गयी है। युगलपीठ ने एफआईआर का अवलोकन करने पर पाया कि आरोपी के खिलाफ किस आधार पर प्रकरण दर्ज किया गया है उसका उल्लेख नहीं किया गया गया। हाईकोर्ट के आदेश का अक्षरश: पालन किया जायेगा। कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्नढ्ढक्र की भाषा,धाराएं और तरीके पर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसी भाषा के साथ एफआईआर लिखी गई है कि वह निरस्त हो जाए। इसमें आरोपी के अपराध का जिक्र नहीं है। आरोपी के हित को देखते हुए इसे दर्ज किया गया है। इस पर कोर्ट में महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य की मंशा पर शक ना किया जाए। कोर्ट के आदेशों का पालन किया जा रहा है।
मंत्री के विवादित बयान पर दर्ज एफआईआर की भाषा पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने गुरुवार को मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर को सिर्फ खानापूर्ति बताया है। हाईकोर्ट ने कहा कि अब इस पुलिस जांच की निगरानी कोर्ट करेगी। जांच किसी दबाव में प्रभावित ना हो इसलिए ऐसा करना जरूरी है। हाईकोर्ट इस मामले में छुट्टियों के बाद फिर सुनवाई करेगा।
हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने गुरुवार को अपना आदेश सुनाते हुए कहा था… एफआईआर को पूरी तरह से देखने पर संदिग्ध के कार्यों का एक भी उल्लेख नहीं मिला, जो उसके खिलाफ दर्ज किए गए अपराधों के तत्वों को संतुष्ट करता हो। एफआईआर इस तरह दर्ज की गई ताकि यदि पूर्ववर्ती सीआरपीसी की धारा 482 के अंतर्गत चुनौती दी जाती है तो इसे रद्द किया जा सके, क्योंकि इसमें भौतिक विवरण की कमी है। न्यायालय निर्देश देता है कि 14 मई का पूरा आदेश एफआईआर के पैरा 12 के भाग के रूप में पढ़ा जाएगा।
काले कपड़े पहनकर मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी
कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित और आपत्तिजनक बयान देने पर मंत्री विजय शाह के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। कांग्रेस उनके बयान के बाद से लगातार हमलावार है, और इस्तीफे की मांग कर रही है। वहीं शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक का प्रतिनिधिमंडल राज भवन पहुंचा। यहां मंत्री को बर्खास्त करने की मांग को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया। वहीं राजभवन के बाहर कांग्रेस विधायकों ने काले कपड़े पहनकर मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सिंघार ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपनी सुनवाई में भी विजय शाह के इस बयान को अपमान जनक भाषा की संज्ञा दी। कांग्रेस सहित पूरे देश की आज यही मांग है कि सरकार मंत्री विजय शाह के इस बयान पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें बर्खास्त करे। आज भोपाल के राजभवन में कांग्रेस विधायक दल के साथ राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल से भेंट कर मंत्री विजय शाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई एवं बर्खास्त हेतु ज्ञापन सौंपा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह का शर्मनाक और आपत्तिजनक बयान न सिर्फ़ मेजर सोफिया कुरैशी का, बल्कि हर उस बेटी का अपमान है, जो देश के लिए वर्दी पहनती है। हम यह साफ़ कर देना चाहते हैं विजय शाह का बयान सिर्फ़ निंदनीय नहीं, बल्कि भाजपा सरकार की विकृत मानसिकता का घिनौना उदाहरण है जिसके लिए भाजपा सरकार को गहन चिंतन करने की जरूरत है। इधर राज भवन के बाहर धरना दे रहे कांग्रेस विधायकों को पुलिस ने जबरन उठा लिया। कई विधायकों के हाथ-पैर पडक़र पुलिस ने बस में भरा और सारे विधायकों को गिरफ्तार कर ले गई।
विजय शाह के बयान के बाद से ही पूरे मध्य प्रदेश में विजय शाह के कहीं पुतले जलाए जा रहे हैं तो कहीं उनके पुतलों पर जूते चप्पल बरसाए जा रहे हैं कांग्रेस इस पूरे मुद्दे को लेकर प्रदेश भर में बेहद आक्रामक है और जिला स्तर पर लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है इस संबंध में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने क्या कुछ कहा है लिए आपको सुनवाते हैं………..
शाह के मामले में मजबूर हुए मुख्यमंत्री
इस तरह के मामलों में देश भर में परंपरा रही है कि जब कोई मंत्री इस तरह का बयान देता है तो मुख्यमंत्री को उसे मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने अथवा उसको बर्खास्त करने की सिफारिश राज्यपाल से करने का पूरा अधिकार होता है लेकिन मध्य प्रदेश में इस बार स्थिति बिलकुल उलट है क्योंकि यहां मुख्यमंत्री भी विधायक दल की बैठक में नहीं चुना गया बल्कि सीधे दिल्ली से नामित किया गया है जिसके चलते अब मुख्यमंत्री को अपने हर फैसले के लिए दिल्ली की ओर देखना पड़ रहा है वही विजय शाह के मामले में पूरे प्रदेश भर में भाजपा की जमकर किरकिरी हो रही है भाजपा नेता मीडिया में बयान देने से बच रहे हैं तो वहीं हर मामले में विरोधियों पर मुखर होकर बोलने वाली भाजपा की महिला नेत्रियों ने भी इस मुंह बंद कर रखा है !
आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें
अब सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की याचिका पर सुनवाई 19 मई को सुनवाई होगी लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस क्या शाह के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मामले में उन्हें गिरफ्तार कर सकेगी या नहीं वही कानून के जानकार कहते हैं कि इन जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ है उसमें गिरफ्तारी तत्काल की जानी चाहिए!
जस्टिस सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच में मामले में की सुनवाई हुई जिसमें मंत्री विजय शाह की ओर से वकील मनिंदर सिंह ने दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय मांगा जिस पर कोर्ट ने उन्हें तीन दिन का समय देते हुए अगली सुनवाई 19 मई को तय की है वही विजय शाह की याचिका में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 14 मई के आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था वही इंटर विनर के रूप में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी इस मामले में अपना पक्ष रखने का अनुरोध किया था जस्टिस सूर्यकांत ने उन्हें भी 19 में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है !
वही अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मुख्यमंत्री मोहन यादव विजय शाह के खिलाफ निर्णायक कार्यवाही करने में क्यों हिचक रहे है वहीं अब माना जा रहा है कि 19 में की सुनवाई को लेकर भी संगठन वेट एंड वॉच की स्थिति में है यदि 19 मई को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर हुई एफ आई आर को सही ठहरा दिया तब संगठन विजय शाह के खिलाफ कार्यवाही करने की निर्णायक स्थिति में होगा इस मामले मे सीनियर एडवोकेट अजय गुप्ता कहते हैं कि हाई कोर्ट के निर्देश के बाद जिन धाराओं में मामला दर्ज हुआ है उसमें उनकी गिरफ्तारी तत्काल की जानी चाहिए क्योंकि शाह के खिलाफ देश की अखंडता को बाधित करने का आरोप है!
वहीं अब विजय शाह के खिलाफ नए सिरे से एफ आई आर दर्ज करने का मामला है तो उसमें जो पेंच फंसता नजर आ रहा है वह यह है कि हाई कोर्ट के निर्देश पर मंत्री शाह के खिलाफ जो एफ आई आर दर्ज की गई थी वह सीसीटीएनएस सॉफ्टवेयर में फ्रीज हो चुकी है इसलिए अब उसमें कोई भी संशोधन नहीं हो सकता है यहां तक की एफ आई आर में मंत्री के नाम के आगे लिखा गया श्री शब्द भी नहीं हो सकता मूल एफ आई आर की प्रति में यह हमेशा के लिए दर्ज रहेगा हां अब यह होगा कि केस में जुड़े सभी तथ्य केस डायरी में जोड़े जाएंगे अब हाई कोर्ट की नाराजगी के बाद पुलिस अब जांच नए सिरे से करेगी कोर्ट ने कहा कि जो भी तथ्य फिर में छुटे हैं वह उसी का हिस्सा माने जाएंगे और जांच उसी आधार पर की जाएगी
इस मामले में डीआईजी निमिष अग्रवाल ने कहा एफ आई आर में अब कोई बदलाव नहीं हो सकता जो पार्ट छूट गया है उसे भी एफ आई आर का हिस्सा माना जाएगा और जांच हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार होगी
अब कुल मिलाकर इतना तो तय है कि विजय शाह का पीछा इस मामले से इतनी आसानी से और इतनी जल्दी छूटने वाला नहीं है !
