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क्यों हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे जिम्मेदार विभाग, प्रशासनिक अधिकारी
टीकमगढ़ । जिले से 25 हजार क्विंटल घटिया स्तर का चावल टीकमगढ़ भेजे जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा हैं। मामले की गूंज संस्कारधानी से प्रदेश की राजधानी तक पहुंच चुकी हैं। जिसके बाद संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही मामले में उच्च स्तरीय जांच के लिए टीम शहर आ सकती हैं। मामले में सवाल उठ रहे हैं कि वेयरहाउसिंग कारपोरेशन, जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम सहित अन्य विभाग एवं उनके शीर्ष अधिकारी क्यों मौन धारण कर आंखे मूंदे रहे। मामले में अपना पल्ला झाड़ने जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों ने जिन मिलर्स से मिलीभगत कर यह कारनामा किया अब खुद की नौकरी बचाने मिलर्स पर ही पूरी गफलत का ठीकरा फोडऩे की तैयारी की जा रही हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार राशन दुकानों के लिए जबलपुर से टीकमगढ़ भेजे गए घटिया चावल के मामले में कथित तौर पर मिलर्स की लापरवाही तो हैं ही साथ ही मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग कारपोरेशन सहित अन्य विभागों के अधिकारियों की भी लापरवाही से सामने आ रही हैं। अन्य जिले में भेजे जा रहे अनाज की गुणवत्ता जांच करने वाली जिस निजी कंपनी पर आंख मूंद कर भरोसा किया गया उसके निरीक्षकों ने भी अधिकारियों के प्रश्रय में कथित तौर पर घपलेबाजी में साथ दिया। बिना जांच किए ही चावल की बोरियों की निकासी कर दी गई।
अनाज सड़ाने के मामले में टॉप पर हैं जबलपुर
जबलपुर जिले में लगातार गेहूं और चावल के साथ ही धान को सड़ाने के प्रकरण सामने आते रहे हैं। शराब माफिया को बड़ी मात्रा में आपूर्ति जबलपुर जिले से होती हैं। शराब माफिया के सूत्रों के अनुसार शराब निर्माण के लिए बड़ी भूमिका निभाने में सड़े अनाज की भूमिका महत्वपूर्ण हैं और इसकी आपूर्ति में जबलपुर जिला टॉप पर हैं। सड़ा अनाज शराब माफिया को सौंप जिम्मेदार विभागों के अधिकारी, कर्मचारी तो चांदी काटते हैं लेकिन इसमें शासन को करोड़ों रुपए की क्षति उठानी पड़ी है। इसके बाद भी इस पर रोक नहीं लगाई गई। मिलर्स भी इसमें पीछे नहीं रहे हैं। हाल में धान मिलिंग में 47 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया। जो धान गायब था, वह अभी तक नहीं मिला। इसी प्रकार जिला स्तरीय मिलर्स की जांच कराई गई। उसकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई।
वेयरहाउस शाखा प्रबंधक ने पकड़ी गड़बडी
टीकमगढ़ में वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के अधिकारी ने ही इस गड़बड़ी को पकड़ा था। जब वहां इसकी जांच की गई तो जबलपुर में चावल भेजने से पहले गुणवत्ता को कैसे अनदेखा कर दिया गया। जानकारों का कहना है कि कहीं न कहीं यह मिलर्स, वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के साथ ही मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन, जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम सहित अन्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों की मिलीभगत थी। अन्यथा 26 हजार क्विंटल बिना अधिकारियों, कर्मचारियों के जानकारी के जिले से बाहर नहीं जा सकता था।
अब करनी होगी ग्रेडिंग
इस चावल को वापिस कर उसकी ग्रेडिंग की जाएगी। इस काम में दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है। उन्हें खराब चावल अलग कर उसकी लगातार जगह उच्च गुणवत्ता का चावल देन होगा। इसके लिए चाहे उन्हें जेब से पैसा लगाना पड़े। इसके लिए कारपोरेशन ने आदेश जारी कर दिए हैं। ऐसे में अब सिविल सप्लाई कारपोरेशन को दूसरी गोदामों से अच्छा चावल सप्लाई करना होगा।

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