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कृषि उपज मंडी में किसानों को नहीं मिल पा रहा है धान का वाजिब दाम
बालाघाट। कृषि उपज मंडी गोंगलई में व्यापारी धान की कम बोली लगा रहे हैं। किसानों को धान का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि किसान औने-पौने दाम पर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर है। विडंबना यह है कि मंडी में हम्मालों की कमी बनी हुई है। किसानों को अपनी फसल की सुरक्षा के लिए स्वयं ही मेहतन करनी पड़ती है। यह समस्या वर्षों से बनी हुई है। बावजूद इसके अभी तक इसका निराकरण नहीं हो पाया है।
मंडी पहुंचे गोंगलई और चिचगांव के किसानों ने बताया कि कृषक बेहतर दाम की उम्मीद लगाए धान की फसल को बेचने के लिए कृषि उपज मंडी लेकर आता है। लेकिन मंडी में उन्हें धान का उचित दाम नहीं मिल पाता है। मंडी पहुंचने वाली व्यापारी एक हो जाते हैं। कम दाम से बोली शुरु करते हैं। कोई भी व्यापारी दाम बढ़ाकर नहीं देता है। मजबूरी में किसानों को कम दाम पर ही अपनी उपज बेचना पड़ता है। ऐसे में उनकी लागत भी नहीं निकल पाती है। खासतौर पर रबी के सीजन में उत्पादित धान में यही समस्या बनी रहती है।
अधिकतम 17 सौ रुपए प्रति क्विंटल बिक रही धान
किसानों का कहना है कि मंडी में अभी तक धान की ज्यादा बोली नहीं लगी है। अच्छी से अच्छी धान भी अधिकतम 17 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से बिकी है। वहीं व्यापारी इससे भी कम दाम पर धान की खरीदी कर रहे हैं। ऐसे में किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि पिछले बार उन्होंने महामाया और आईआर 36 धान का विक्रय 21 से 23 सौ रुपए प्रति क्विंटल तक किया था। लेकिन इस वर्ष उसी फसल का दाम महज 16 सौ से 17 सौ रुपए तक मिल पा रहा है। मंडी में धान की बिक्री व्यापारियों पर ही निर्भर रहती है।
रबी सीजन में भी समर्थन मूल्य पर हो धान की खरीदी
सरकार खरीफ सीजन में धान की खरीदी समर्थन मूल्य पर करती है। जिससे किसानों को धान का अच्छा मूल्य मिल जाता है। लेकिन रबी सीजन में धान का बेहतर दाम नहीं मिल पाता है। किसानों ने मांग की है कि रबी सीजन की धान भी समर्थन मूल्य में खरीदी जाए। ताकि किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम मिल सकें और वे व्यापारियों के शोषण से बच जाए।
समय पर नहीं हो पाता है तौल
किसानों ने बताया कि मंडी में किसानों की धान का तौल समय पर नहीं हो पाता है। जिसके कारण किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अपनी उपज की सुरक्षा के लिए उन्हें रतजगा तक करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि मंडी में तीन-तीन दिन तक उपज का तौल नहीं होता है। मंडी प्रबंधन भी इस ओर ध्यान नहीं देता है। जिसके कारण किसान काफी परेशान है।
किसानों को करनी पड़ती है मेहनत
कृषि उपज मंडी गोंगलई मेें हम्मालों की भी कमी है। महज दो गेंग के करीब 8 से 10 सदस्यों के सहारे ही मंडी में हम्माली का काम हो रहा है। हम्माल भी समय पर धान का तौल व भराव नहीं करते हैं। जिसके चलते किसानों को हम्मालों का कार्य स्वयं करना पड़ता है। विडंबना यह है कि यहां मेहनत किसान करते हैं और हम्माली की मजदूरी हम्मालों की दी जाती है। किसानों का कहना है कि यदि वे मेहनत नहीं करते हैं तो उन्हें या तो रतजगा करना पड़ता है या फिर उनकी धान चोरी हो जाती है। जिससे उन्हें काफी नुकसान होता है।

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