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जब महिला अपनी मर्जी से युवक के साथ गई थी, तो पुलिस ने बलात्कार का मामला कैसे दर्ज किया

नई दिल्ली। रेप के मामले में सुप्रीम कोर्ट आरोपी युवक को राहत दी है। साथ ही पुलिस को फटकार लगाते हुए पूछा कि आपने 376 के तहत मामला कैसे दर्ज कर लिया। कोर्ट ने कहा कि युवक नौ महीने से जेल में है, लेकिन अभी तक उसके खिलाफ आरोप तय नहीं हुए हैं। इसलिए उसको जमानत दी जा रही है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने दिल्ली पुलिस पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने पूछा कि जब महिला अपनी मर्जी से युवक के साथ गई थी, तो पुलिस ने बलात्कार का मामला कैसे दर्ज किया। बेंच ने कहा कि एक हाथ ताली नहीं बजा सकता। आपने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत मामला किस आधार पर दर्ज किया? वह महिला बच्ची नहीं है, वह 40 साल की है। वे दोनों साथ में जम्मू गए थे। फिर धारा 376 क्यों लगाई गई?
कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी को ट्रायल कोर्ट के सामने पेश किया जाए और उसे शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दी जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि युवक को अपनी आजादी का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए और न ही वह महिला से संपर्क करने की कोशिश करे। युवक एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर है। सुप्रीम कोर्ट ने उसके बारे में भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों से कौन प्रभावित होता है? यह मामला उस याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें युवक ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अंतरिम जमानत देने से इनकार किया गया था।
कोर्ट का यह फैसला मामले की परिस्थितियों पर आधारित था, जहां यह सवाल उठा कि क्या पुलिस ने उचित आधार के बिना बलात्कार का मामला दर्ज किया। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए यह स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों की सहमति और परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। इस अंतरिम जमानत के साथ कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि आरोपी कानूनी प्रक्रिया का पालन करे और मामले की अगली सुनवाई में ट्रायल कोर्ट के सामने पेश हो।

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