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श्रेणी सुधार के लिए छात्रों ने परीक्षा दोबारा दी थी
इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने 12 वीं के दो छात्रों द्वारा उनके रिजल्ट रोकने के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करते उन्हें राहत देने के साथ स्कूल पर कास्ट लगाई है। ऋग्वेद एवं देवनारायण नामक दो छात्रो द्वारा श्रेणी सुधार के लिए दी गई दोबारा परीक्षा पर उनका रिजल्ट रोकने के इस मामले में पहले तो परीक्षा के पूर्व इन्हें यह कहते हुए परीक्षा देने से रोक दिया गया था कि नियम के मुताबिक केवल एमपी बोर्ड से ही पूर्व में परीक्षा देने वाले छात्र श्रेणी सुधार हेतु पुनः परीक्षा देने के लिए पात्र हैं। इस पर दोनों छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट को बताया कि उन्होंने आईसीएसई से 12वीं की परीक्षा दी थी, जिसमें वे पास तो हुए, लेकिन बी श्रेणी मिली। इस पर इन्होंने अपनी श्रेणी सुधारने के लिए फिर से शाजापुर के पायोनियर हासे स्कूल से एमपी बोर्ड के माध्यम से परीक्षा देने के लिए एडमिशन सारे तथ्य बताने के साथ लिया। एडमिशन के बाद उन्होंने सालभर पढ़ाई करते परीक्षा के लिए फार्म भी भरा लेकिन उन्हें परीक्षा के पूर्व यह कहते हुए रोक दिया गया कि नियम के मुताबिक केवल एमपी बोर्ड से ही पूर्व में परीक्षा देने वाले छात्र श्रेणी सुधार हेतु पुनः परीक्षा देने के लिए पात्र हैं। याचिका सुनवाई पर दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने अंतरिम आदेश में इन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति इस निर्देश के साथ दी कि इसके रिजल्ट याचिका के अंतिम निराकरण के अधीन रहेंगे। इस पर स्कूल ने परीक्षा के बाद इनके रिजल्ट रोक लिए थे। सुनवाई उपरांत कोर्ट ने अपने अंतिम निर्णय में संबंधित को इनके रिजल्ट घोषित कर मार्कशीट जारी करने के निर्देश देते कहा कि याचिकाकर्ताओं की ओर से एडमिशन के पूर्व कोई तथ्य नहीं छुपाए गए थे। यदि नियम नहीं था तो स्कूल को एडमिशन ही नहीं देना था एवं ना ही फार्म स्वीकार करते समय माशिमं ने कोई आपत्ति ली। कोर्ट ने संबंधित स्कूल को निर्देश दिया कि वह दोनों याचिकाकर्ताओं से प्राप्त पूरी फीस माध्यमिक शिक्षा मंडल को दो माह की अवधि के भीतर भेज दे, साथ ही स्कूल पर पांच-पांच हजार रुपए कॉस्ट लगाई। यह राशि हाईकोर्ट एम्पलाइज यूनियन के बैंक खाते में दो माह में जमा करनी होगी।

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