शातिर दम्पत्ति और उनके साथी को सात सात साल की सजा

इन्दौर। खुद के पहले से 25 लाख में बेच चुके मकान को फिर से किसी और को 30 लाख में बेचने एवं दूसरे की जमीन को अपने नाम बता धोखाधड़ी करने के प्रकरण में सुनवाई करते कोर्ट ने एक शातिर दिमाग दंपति और उनके साथी को प्रकरण में दोषी करार देते सात सात साल की सजा से दंडित किया है। प्रकरण में अभियोजन पैरवी लोक अभियोजक अजय मिमरोट ने की। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि कविता पिता मोतीलाल निवासी बक्षीबाग के साथ आरोपी राजेश एवं उसकी पत्नी प्रवीणा ने सुदामा नगर स्थित अपने स्वयं के हक़ के मकान का सौदा कर 30 लाख रुपए ले लिए और इसका विक्रय इकरारनामा निष्पादित कर दिया। बाद में ज्ञात हुआ कि उक्त दोनों आरोपी इसके पहले यही मकान हर्षल एवं उसके पिता राजेश कश्यप को 25 लाख रुपए में बेच चुके थे। वहीं इसी मकान को एक बेचने के लिए एक अन्य व्यक्ति प्रदीप के साथ 40 लाख में इसका सौदा किया था। यही नहीं आरोपियों ने उक्त मकान को खरीदने के लिए फरियादी द्वारा दिए रूपयों के एवज में ग्राम नेवारी की एक जमीन का विक्रय अनुबंध किया, जो किसी नितिन के नाम थी, लेकिन सहअभियुक्त मनीष मेहता ने कूटरचित दस्तावेज के माध्यम से खुद को नितिन बताकर यह अनुबंध किया। प्रकरण सुनवाई उपरांत कोर्ट ने राजेश गुप्ता पिता रमेश और उसकी पत्नी प्रवीणा निवासी सुदामा नगर और सहअभियुक्त मनीष मेहता पिता ओमप्रकाश निवासी सुदामा नगर को धोखाधड़ी कर संपत्ति के नाम पर पैसे ऐंठने का दोषी करार देते उक्त सजा से दंडित किया।
