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सुप्रीम कोर्ट ने बेटी का यौन उत्पीड़न करने के मामले में डॉक्टर को नहीं दी जमानत


देहरादून। सुप्रीम कोर्ट ने बेटी का यौन उत्पीड़न करने के मामले में दोषी डॉक्टर को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शराब पीने के बाद व्यक्ति दरिंदा बन जाता है। जस्टिस बी वी नागरत्ना और सतीशचंद्र शर्मा की पीठ ने साल साल की बेटी के यौन उत्पीड़न में दोषी हृदय रोग विशेषज्ञ की सजा स्थगित करने से साफ इनकार कर दिया।
सुनवाई में जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि शराब पीने के बाद व्यक्ति दरिंदा बन जाता है। उन्होंने डॉक्टर के वकील से कहा कि आपके मुवक्किल को अपनी ही साल साल की मासूम बेटी का यौन उत्पीड़न करने के लिए निचली कोर्ट ने दोषी ठहराया है। उसने बच्ची से किस तरह की हरकतें की हैं। आपका मुवक्किल किसी भ्री तरह की राहत का हकदार नहीं हैं। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि बच्ची ने अपने पिता के खिलाफ बयान दिए हैं। डॉक्टर विकृत व्यक्ति है।
जस्टिस नागरत्ना ने वकील से कहा कि कोई भी अपनी बेटी के साथ इस तरह का कृत्य कैसे कर सकता है, वह अपने ही पिता के खिलाफ गवाही क्यों देगी? वह एक छोटी बच्ची है, जिसने जिरह का सामना किया है। हमें ऐसा नहीं कहना चाहिए, लेकिन हम सबसे उदार पीठ हैं। पीठ ने कहा कि यदि हम जमानत नहीं दे रहे हैं, तो इसके पीछे कारण है। उसने शराब के नशे में बेटी का यौन उत्पीड़न किया है। पुलिस की प्राथमिकी में पीड़िता की मां ने पति पर सात साल की बेटी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था।
पीड़िता की मां ने कहा था कि वह वाराणसी में रहती है, जबकि उसका अलग हुआ पति हल्द्वानी में रहता है, जहां वह नर्सिंग होम चलाता है। 23 मार्च 2018 को डॉक्टर बेटी को हल्द्वानी ले गया था और 30 मार्च को पत्नी को फोन करके उसे ले जाने को कहा। लड़की ने मां को बताया कि पिता एक बुरे इंसान हैं और उन्होंने बुरा व्यवहार किया है

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