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पिछले एक हफ्ते में नहीं मिली कोई नई शिकायत

दमोह ! जिले के हटा थाना अंतर्गत ग्राम हारट एवं बरोदा गांव के बीच करीब 18 दिन पूर्व एक शासकीय शिक्षक राजेश त्रिपाठी की संदिग्ध अवस्था में जलकर मौत हो जाने के मामले में पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा तो कर दिया है लेकिन इस खुलासे के बाद जो पूरी कहानी सामने आई है उसने पूरे प्रशासन तंत्र को हिला कर रख दिया है क्योंकि जिस मामले में पहले लूट और हत्या की आशंका जताई जा रही थी मामला इतना सीधा ना होकर बल्कि बेहद चौंकाने वाला निकला पुलिस की जांच में जो अब तक सामने आया है उसके अनुसार शिक्षक के साथ न लूट हुई थी ना उसकी किसी ने हत्या की है बल्कि सारा मामला कर्ज में दबे होने और लगातार एक आईटीआई कार्यकर्ता के द्वारा ब्लैकमेल करने के चलते ही आत्महत्या करने की बात सामने आई है इस पूरे मामले में जो सबसे चौंकाने वाली घटना आई है उसने सुनने और जानने वालों को हैरान कर दिया है बताया गया है कि मृतक शिक्षक द्वारा फर्जी डी एड की मार्कशीट लगाकर नौकरी लेने के मामले में शिक्षक को एक आईटीआई कार्यकर्ता पिछले 7 साल से लगातार ब्लैकमेल कर रहा था इतना ही नहीं वह करीब 20 से 22 लख रुपए उस शिक्षक से ले भी चुका था इसके बाद अब जब उसने फिर से 5 लाख रुपए की और मांग की तो शिक्षक ने इतना पैसा देने से मना कर दिया और इसी ब्लैकमेलिंग के चलते उसने आत्महत्या कर ली इस मामले की पुलिस ने बारीकी से परत दर परत जांच की थी!

इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने इस तरह के और मामले हो सकने की आशंका के चलते लोगों से खुलकर सामने आने और संबंधित आरोपी जितेंद्र भट्ट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने को कहा था किन्तु करीब एक हफ्ते बाद भी एक भी शिकायतकर्ता सामने नहीं आया जिसके बाद अब पुलिस ने इसी एक मामले में अपनी जांच तेज कर दी है !

इस मामले का खुलासा करते हुए हटा के एसडीओपी प्रशांत सुमन ने बताया था कि लूट, आगजनी और हत्या की सूचना को और घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पांच पार्टी गठित की थी इसके अलावा साइबर सेल टीम , फॉरेनसिक एक्सपर्ट टीम , फिंगरप्रिंट टीम व डाग स्क्वायड द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किया गया था जिसमें हत्या अथवा लूट जैसे कोई भी साक्ष्य नहीं मिले पुलिस ने घटनास्थल के पास टोल नाका एवं हटा के करीब 200 सीसीटीवी कैमरा के फुटेज देखे थे फुटेज में मृतक के पीछे कोई भी वाहन या व्यक्ति पीछा करते हुए नहीं दिखा वहीं पुलिस जांच में यह भी साफ हुआ है कि मृतक त्रिपाठी के ऊपर बैंक का कर्ज हो गया था ! वहीं घटना दिनांक को सोशल मीडिया पर फर्जी अंकसूची पर नौकरी कर रहे शिक्षकों पर कार्यवाही होने की खबर भी प्रकाशित हुई थी जिसके बाद से ही जिलेभर में फर्जी अंक सूची पर नौकरी कर रहे विभिन्न विभागों के कर्मचारियों में अफरा तफरी आलम था पुलिस ने इस पूरे मामले में विभिन्न एंगल से जांच की थी !

जिले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की शिकायतें पिछले कई वर्षों से सामने आती रही है किंतु तत्कालीन अफ़सरों ने इन मामलों मैं गंभीरता नहीं बरती लेकिन जब से दमोह जिले में कलेक्टर के रूप में सुधीर कुमार कोचर की नियुक्ति हुई है उन्होंने इस तरह की की शिकायत तो को गंभीरता से लेना शुरू किया और उनकी जांच भी समय बद्ध ढंग से निपटने के निर्देश दिए हैं सूत्रों की माने तो जांच के दौरान करीब 40 शिक्षक ऐसे पाए गए हैं जिन्होंने फर्जी अंक की सूची के माध्यम से नौकरी प्राप्त की थी इनमें से अधिकांश तो ऐसे हैं जो पिछले 22 से 25 साल से लगातार नौकरी कर रहे हैं और शासन से वेतन के रूप में लाखों रुपए प्राप्त कर रहे हैं एक साथ इतने अधिक फर्जी शिक्षकों का मामला सामना आने के बाद से ही पूरे जिले में ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में ही मैं भी हड़कंप मचा हुआ है वहीं प्रशासन द्वारा जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर करीब 24 शिक्षकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं जबकि कहीं जांच में फंसने और जेल जाने के डर से नौकरी छोड़ चुके हैं इस मामले में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर का कहना था की जांच के बाद जिन जिन प्रकरणों में गड़बड़ी पाई गई है उनमें एफ आई आर के निर्देश दिए गए हैं अब तक कुल 40 शिकायते प्राप्त हुई है 24 प्रकरण में जो विश्वविद्यालय है जहां से भी उनकी डिग्री ली गई थी उन में जानकारी आ गई है कि उक्त डिग्री सही नहीं है जो प्रस्तुत की गई है इन सभी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं 11 मामलों की जांच संयुक्त संचालक द्वारा की जा रही है एक प्रकरण की जांच भोपाल में चल रही है 40 में से 10 शिक्षकों को नौकरी से निकाला जा चुका है इसके अलावा भी आगे ऐसे जो भी प्रकरण आएंगे उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी

अब इस पूरे ब्लैकमेलिंग कांड का जो मुख्य किरदार है उसका नाम है जितेंद्र भट्ट रहने वाला ग्राम हर्रई थाना तेजगढ़ जिला दमोह है जो पिछले कुछ दिनों से नर्मदा पुरम जिले के इटारसी में रहने लगा था पुलिस ने बताया मृतक के मोबाइल की सीडीआर पर पाए गए साक्ष्य एवं साक्षियों के द्वारा अपने कथन में जितेंद्र भट्ट के द्वारा वर्ष 2018 से डी एड की मार्कशीट फर्जी होने की बात कह कर शिक्षक स्वर्गीय राजेश त्रिपाठी के विरुद्ध शिकायत करने एवं एफ आई आर कर जेल भिजवाने की धमकी देकर करीब 20 से 22 लाख रुपये ऐंठने एवं इतने सबके बाद भी 5 लाख की और मांग करने और पैसा ना देने पर लिखित शिकायत करने की बात स्पष्ट हुई है वहीं मृतक के सीडीआर के अवलोकन पर जितेंद्र भट्ट के द्वारा मृतक से संपर्क में होना पाया गया है संपूर्ण जांच पर जितेंद्र भट्ट के विरुद्ध मृतक शिक्षक त्रिपाठी को वर्ष 2018 से लगातार ब्लैकमेल कर लाखों रुपए ऐंठने के बाद भी 5 लाख मांग रहा था और पैसे नहीं देने पर शिक्षक के विरुद्ध शिकायती आवेदन जिला पंचायत कार्यालय दमोह में प्रस्तुत करने से मानसिक और आर्थिक रूप से प्रसारित होकर आग लगाकर आत्महत्या करना पाया गया है पुलिस ने भी अपनी जांच के बाद जितेंद्र भट्ट निवासी ग्राम हरर ई थाना तेजगढ़ को इटारसी से गिरफ्तार कर दमोह लाया गया जहां उसे न्यायालय में पेश किया गया है जहां से उसे जेल भेज दिया गया है इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आरोपी को न्यायालय में पेश करने की बजाय पुलिस को उसे डिमांड पर लेना चाहिए था ताकि पूछताछ में इस मामले में और ऐसे मामलों का खुलासा हो सके क्या पता वह ऐसे कितने मामलों में कितने शिक्षकों को ब्लैकमेल कर रहा हो !

वहीं अब हटा थाने के टी आई धर्मेंद्र उपाध्याय ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब विवेचना की जा रही है इस दौरान यदि कोई और शिक्षक या अन्य कोई आरोपी जितेंद्र भट्ट की धमकी, अवैध वसूली से पीड़ित हो तो वह पुलिस के सामने आकर अपने कथन दे सकता है ताकि इस तरह के ब्लैकमेलर के खिलाफ साक्ष्य न्यायालय में पेश किया जा सके और आगे अब इस तरह से कोई और आत्महत्या के लिए विवस ना हो !

जिले ही नहीं प्रदेश भर के अनेकों विभागों खासतौर से पंचायतों, जनपदों , जिला पंचायतों, आर ई एस, वन विभाग, पी डब्ल्यू डी, पी एच ई, नगरीय निकायों, स्वास्थ्य विभाग में हर महीने सैकड़ों आवेदन आते हैं किंतु जब जानकारी के एवज में शुल्क जमा करने का नोटिस जारी किया जाता है तो अधिकांश या तो नोटिस ही नहीं लेते तो अधिकांश जानकारी लेने नहीं आते कई तो लिखित में तक दे देते हैं कि उन्हें चाही गई जानकारी की अब आवश्यकता नहीं है जिसके पीछे के पूरे खेल को आसानी से समझा जा सकता है! लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ अधिनियम में कार्यवाही करने कोई प्रावधान ना होने से उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हो पाती
वर्ष 2005 में केंद्र सरकार ने आईटीआई अधिनियम 2005 एक ऐसा कानून तैयार करके आम जनता के हाथ में दिया था जो भारत के नागरिकों को सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थाओं से सूचना मांगने का अधिकार देता है यह प्रदर्शित जवाब देगी और सुशासन को सुनिश्चित करने में मदद करता है आईटीआई अधिनियम भारत में लोकतंत्र को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है यह नागरिकों को सरकार से प्रश्न करने और जवाब जानने का अधिकार देता है जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाब देगी बढ़ती है लेकिन अब पिछले कुछ सालों से आरटीआई कानून का निरंतर दुरुपयोग की खबरें सामने आ रही है जिसमें खास तौर से जानकारी मांगने के आवेदन देने के बाद जानकारी न लेने ना मांगने के बदले आर्थिक लेन देन का आरोप प्रमुख रूप से है! जबकि ऐसा नहीं है इसी आईटीआई अधिनियम के तहत सैकड़ो भ्रष्टाचार के प्रकरण भी उजागर हुए हैं किंतु इस मामले जिस तरह से दुरुपयोग हुआ है उसको रोकने के लिए अधिनियम में कोई सीधा सख्त प्रावधान नहीं दिया गया है जिसका फायदा अब आपराधिक और खुराफाती तत्व जमकर उठा रहे हैं !

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