प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट का निर्देश
जबलपुर। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी जगमोहन सिंह की अदालत ने नौकरी दिलाने के बहाने नौ लाख रुपये की राशि हड़प किए जाने के आरोप के मामले में पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही न किये जाने के रवैये को गंभीरता से लिया। इसी के साथ आरोपित सीओडी कर्मी पीएल चौधरी व पूर्व मंत्री के कथित भांजे रीतेश गुप्ता के विरुद्ध धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के अंतर्गत अपराध पंजीबद्व करने के निर्देश देते हुए दोनों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए। अदालत ने उन्हें 20 अगस्त को अगली सुनवाई दौरान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

यह परिवाद समता कालोनी, जबलपुर निवासी 506 आर्मी वर्कशाप से रिटायर्ड कर्मी रामभरोसे चौकसे की ओर से दायर किया गया है। अदालत को अवगत कराया गया कि परिवादी और अनावेदक पीएल चौधरी एक दूसरे के परिचित थे। पीएल चौधरी ने त्रिपाठी के बेटे की रेलवे में नौकरी लगवाने की बात कहते हुए परिवादी को अपने झांसे में लिया और उनसे चार लाख में उनके बेटे दीपक चौकसे की नौकरी लगवाने की बात की। इसके बाद कोर्ट से स्टे होने का झांसा देकर भेल में नौकरी लगवाने की बात कहते हुए 10 लाख में सौदा तय किया। इसके लिये उन्होंने एसोर ग्रुप के मालिक रीतेश गुप्ता से मिलवाया, जो कि खुद को तत्कालीन राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता का भांजा होना बता रहा था। परिवादी आरोपितों के झांसे में आ गया और उसने नौ लाख रुपये अदा कर दिए। गारंटी के तौर पर अनावेदक पीएल चौधरी ने साढ़े तीन लाख रुपये का चैक भी परिवादी को दिया। इसके बाद अनावेदको ने फर्जी ज्वाइनिंग लेटर सहित अन्य दस्तावेज परिवादी को थमा दिए। जालसाजी का शिकार होने की जानकारी लगने पर जब पीडि़त ने पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाही तो पुलिस ने पहले से ही मामला दर्ज होने का हवाला देकर इतिश्री कर ली, जिस पर यह परिवाद दायर किया गया। पूरे मामले का अवलोकन करने के बाद अदालत ने अनावेदक पीएल चौधरी व रीतेश गुप्ता के विरुद्ध धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के अंतर्गत अपराध पंजीबद्व करने के निर्देश देते हुए दोनों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं।
