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300 वर्ष प्राचीन बावड़ी को पुनर्जीवित करने दूसरे दिन भी ग्राम के लोगों ने किया श्रमदान

दमोह: जल गंगा संवर्धन अभियान 2025 के अंतर्गत  नवांकुर संस्था छात्र सर्व कल्याण समिति एवं ग्राम पंचायत पिपरिया तुरकाई द्वारा पथरिया जनपद अंतर्गत ग्राम मड़िया में स्थित लगभग 300 वर्ष पुरानी अति प्राचीन बावड़ी को पुनर्जीवित करने दो दिवसीय श्रमदान कार्यक्रम संपन्न हुआ। आज दूसरे दिन कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, जिला पंचायत सीईओ प्रवीण फुलपगारे, एसडीएम निकेत चौरसिया, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि गौरव पटेल, जनपद सीईओ श्री कटारे, जिला समन्वयक जन अभियान परिषद, कृष्णा पटेल सहित ग्रामीण जनों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर बावड़ी को स्वच्छ और सुंदर बनाने हेतु श्रमदान किया। परिषद से जुड़ी स्वयंसेवी संस्थाओ के प्रतिनिधियों द्वारा भी सहभागिता की गई। इस दौरान कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने श्रमदान में सहभागिता करते हुए कहा कि जन समुदाय का श्रमदान व्यर्थ नहीं जाएगा। इस बावड़ी को अब हम संरक्षित करने का कार्य करेंगे। जल गंगा संवर्धन अभियान की यही मंशा कि अपनी प्राचीन जल संरचनाओं को संरक्षित किया जाए। बावड़ी के संरक्षण और अन्य विषयों के संदर्भ में अधिकारियों को निर्देशित किया है शीघ्र ही बावड़ी अपने सुंदर रूप में देखने मिलेगी। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि गौरव पटेल ने कहा जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से संपूर्ण जिले में जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है सभी ग्रामीण जनों ने और सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर दो दिन तक इस प्राचीन बावड़ी में श्रमदान किया है। अब शासन-प्रशासन के सहयोग से इसे संरक्षित किया जाएगा।

            ग्रामीण रामप्रसाद पटेल ने कहा जब पहले दिन श्रमदान की रूपरेखा बनाने बैठक हुई थी तो हम सभी लोगों ने कहा था कि यह कार्य केवल औपचारिकता ना रहे परंतु आज विश्वास हो गया कि जन सहयोग से भी इस प्रकार के बड़े काम किए जा सकते हैं। उन्होंने कलेक्टर का आभार व्यक्त करते हुए कहा वह हमारे छोटे से गांव में आए और हमारे पूर्वजों की ऐतिहासिक धरोहर इस बावड़ी के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया। यह हमारे गांव के लिए बड़ी बात है।

            श्रमदान कार्यक्रम में परिषद से जुड़ी संस्था धरातल जन कल्याण विकास समिति पथरिया , नेहरू युवा नव जागृति नव युवक मंडल समिति बांसा कला, बांसातारखेडा नेहरू युवक मंडल, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति देवरान, सारखड़ी, बरधारी, तुरकाई, लुहर्रा की सहभागिता रही।

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