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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भुइयां ने एक कार्यक्रम में जेटली का किया जिक्र
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां ने कानून बनाने में न्यायाधीशों की भूमिका को लेकर कहा कि यह कहना गलत है कि जज कानून बनाने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की धारणा का कोई कानूनी या संवैधानिक आधार नहीं है। जस्टिस भुइयां ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का भी जिक्र किया।
बता दें जस्टिस भुइयां महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल द्वारा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय एस ओका के विदाई समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान जस्टिस भुइयां ने कहा कि संविधान ने सुप्रीम कोर्ट को संसद द्वारा बनाए गए कानूनों की पड़ताल करने और संविधान के अनुरूप नहीं पाए जाने पर ऐसे कानूनों का रद्द करने का भी अधिकार दिया है। ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि न्यायधीश कानून बनाने की प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते।
भुइयां ने कहा कि मेरे हिसाब से यह आलोचना की कि जज लोगों द्वारा चुने नहीं जाते इसलिए उन्हें कानून बनाने में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, इसका कोई कानूनी या संवैधानिक आधार नहीं है। संविधान ने सुप्रीम कोर्ट को जांच करने का अधिकार दिया है कि संसद द्वारा बनाया गया कानून संविधान के अनुरूप है या नहीं और अगर नहीं है, तो न्यायपालिका न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग करके ऐसे कानून को रद्द कर सकती है।
जस्टिस भुइयां ने इस दौरान पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अरुण जेटली की आलोचना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जेटली ने कहा था कि संसद के सदस्य जनता द्वारा चुने जाते हैं और जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के जज जनता द्वारा चुनकर नहीं आते और इसलिए जजों को जनता के प्रतिनिधियों द्वारा बनाए गए कानूनों में हस्तक्षेप की इजाजत नहीं है।

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