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एम.डी.आर. एवं सी.डी.आर. प्रकरणों की गई समीक्षा

दमोह। जिले में मातृमृत्यु एवं शिशु मृत्यु की रोकथाम एवं सेवा गुणवत्ता में सुधार के मद्देनजर कलेक्टर एवं जिला स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष सुधीर कुमार कोचर की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में संपन्न हुई। बैठक में दो एम.डी.आर. एवं सी.डी.आर. प्रकरणों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई। इस दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रीता चटर्जी, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विक्रांत चैहान, डॉ. जलज बजाज, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रविन्द्र कुमार, सी.बी.एम.. जबेरा एवं पथरिया तथा मृतका के परिजन मौजूद रहे। मातृमृत्यु समीक्षा बैठक दौरान कलेक्टर श्री कोचर ने संवेदनशीलता के साथ मृतकों के परिजनों से मृतका के चिकित्सा इतिहास, गर्भावस्था दौरान स्वास्थ्य परेशानियों, ग्रामीण स्तर पर आयुष्मान आरोग्यम मंदिर उपस्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं जिला चिकित्सालय में मिली स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होने उपलब्ध दस्तावेजों तथा प्रकरण शीट का बारीकी से अवलोकन भी किया। समीक्षा दौरान कलेक्टर ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थाओं में प्रोटोकॉल अनुसार सेवायें दुरूस्त पाई गई। 

विकासखंड पथरिया के रानू जितेन्द्र कुर्मी की समीक्षा में संस्था स्तर पर दी गई सेवाओं में प्रोटोकॉल अनुरूप स्वास्थ्य सेवायें देना पाया गया। पथरिया सी.बी.एम.. डॉ. जतिन दुबे ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं एचडब्ल्यूसी पर दी गई सेवाओं का विस्तारपूर्वक विवरण प्रस्तुत किया। कलेक्टर ने इस संबंध में परिजनों से पुष्टि भी की।

विकासखंड जबेरा के निकिता पंजी राय के मातृमृत्यु प्रकरण की समीक्षा में यह सामने आया कि संबंधित महिला का उपचार निजी स्वास्थ्य संस्था में चल रहा था साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जबेरा में भी स्वास्थ्य सेवायें दी गई थी।

दमोह शहरी क्षेत्र की बेबी नंदनी बंसल एवं पथरिया के नरसिंहगढ क्षेत्र की बेबी रूबी विश्वकर्मा के सी.डी.आर. प्रकरण की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि जोखिम वाले नवजात मामले में गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल भ्रमण को और अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाये जाने की आवश्यकता है। उन्होने निर्देश दिये कि मैदानी अमले सीएचओ, एएनएम, आशा को नवजात शिशु में उभरे जोखिम के लक्षणों की शीघ्र पहचान एवं प्राथमिक उपचार के संबंध में आवश्यक उन्मुखीकरण किया जाये। जिससे शीघ्र ही उचित स्वास्थ्य संस्था में उपचारित किया जा सके।

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