Spread the love

कोर्ट ने पुलिस विवेचना पर उठाए सवाल
इन्दौर। अपर सत्र न्यायाधीश राजकुमार वर्मा की कोर्ट ने हत्या के एक प्रकरण में विवेचना अधिकारी की विवेचना खामियां बताते पुलिस द्वारा मात्र 350 रुपए के लिए हत्या के आरोपी बनाए गए आरोपी दिलीप एवं सुमित को दोषमुक्त करार दे दिया। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि 5 अगस्त 2019 को विजय कनाड़े नामक युवक की लाश लसूड़िया थाना क्षेत्र के राहुल गांधी नगर में मिली थी, जिस पर कई जगह चोट के निशान थे एवं सिर से खून निकल रहा था। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर विवेचना के बाद दो आरोपियों दिलीप एवं सुमित को गिरफ्तार किया। आरोप था कि 350 रुपए की उधारी के विवाद में आरोपियों ने लात घूंसों से पिटाई कर उसके सिर पर पत्थर मारकर उसकी हत्या कर दी थी। प्रकरण विवेचना तात्कालिक थाना प्रभारी संतोष दूधी द्वारा कर चालान कोर्ट में पेश किया गया जिस पर सुनवाई पश्चात कोर्ट ने अपनी टिप्पणी करते कहा कि प्रकरण में ऐसा कोई साक्ष्य या दस्तावेज अभिलेख पर नहीं हैं, जिनसे प्रतीत हो कि उक्त आरोपियों द्वारा ही इस हत्या की घटना को अंजाम दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि प्रकरण में इतना त्रुटिपूर्ण अनुसंधान किया गया है, जो अनुसंधानकर्ता द्वारा की गई कार्रवाई पर प्रश्नचिह्न अंकित करता है। इतने महत्वपूर्ण केस में ऐसा अनुसंधान करना काफी खेदजनक है, जिसका परिणाम है कि अभियोजन अपने मामले को प्रमाणित नहीं कर सका है।
कोर्ट ने आरोपियों की खून लगी टी-शर्ट की एफएसएल जांच रिपोर्ट में भी दोनों टी-शटों पर मानव रक्त नहीं पाये जाने पर कहा कि अनुसंधानकर्ता निरीक्षक ने कोई दूसरी टी-शर्ट आरोपीगण की जांच के लिए भेजी हो या अन्य कोई कारण रहा हो। कोर्ट ने कहा कि और तो और जो दस्तावेजी साक्ष्य अभियोजन के मामले को प्रमाणित कर सकते थे, वे भी इतने कमजोर है या यूं कहें कि उनका कोई औचित्य ही नहीं है। विवेचक के अनुसंधान का समर्थन किसी साक्षी ने नहीं किया है। कोर्ट ने आरोपियों को दोषमुक्त करार दे दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *