
अधिकारियों के निरीक्षण के बाद भी स्कूलों में नहीं सुधर रही हंै व्यवस्थाएं
बालाघाट। नए शिक्षण सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन शिक्षकों की मनमानी नहीं रुक रही है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूलों में शिक्षक अपने मनमर्जी से कार्य कर रहे हैं। अधिकारियों के निरीक्षण में शिक्षकों की लापरवाही व मनमानी सामने आ रही है। ताजा मामला जिला शिक्षा अधिकारी के निरीक्षण के दौरान दो शिक्षिकाओं के उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कर शाला से गायब रहने का सामने आया है। डीईओ ने इस मामले में दोनों शिक्षिकाओं को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी एके उपाध्याय ने 9 जुलाई को लालबर्रा विकासखंड के अंतर्गत हाईस्कू्ल चिचगांव का आकस्मिक निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने शाला की व्यवस्थाओं को भी देखा था। शाला के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर होने के बाद भी दो शिक्षिकायें शाला में उपस्थित नहीं थी। जिस पर दोनों को शिक्षिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने कहा गया है। जिला शिक्षा अधिकारी उपाध्याय ने शाला के निरीक्षण में पाया था कि शाला में विज्ञान विषय के प्रायोगिक कार्य अब तक प्रारंभ नहीं किये गये है और बच्चों की प्रैक्टिकल फाईल नहीं बनाई गई हैं। उन्होंने हाईस्कूल के प्राचार्य को प्रैक्टिकल कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिये थे। जिसके परिपालन में हाईस्कूल चिचगांव में 14 जुलाई से प्रेक्टिकल कार्य प्रारंभ कर दिये गये हैं।
तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश
डीईओ ने हाईस्कूल चिचगांव के निरीक्षण के दौरान शाला की अकादमिक गतिविधियों की समीक्षा की थी और आवश्यक दिशा निर्देश दिये थे। समीक्षा बैठक में माध्यमिक शिक्षक एकता सोनवाने और संगीता पटले उपस्थित नहीं थी। जबकि शाला की उपस्थिति पंजी में उनके द्वारा हस्ताक्षर किये गये थे। इस पर इन दोनों माध्यमिक शिक्षिकाओं को नोटिस जारी किया गया है, क्यों न इस लापरवाही के लिए उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाये। दोनों शिक्षिकाओं को तीन दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने कहा गया है। समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एक पक्षीय कार्यवाही की जायेगी।
तल्लाबोड़ी में एक माह से बंद मिली थी शाला
परसवाड़ा विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला तल्लाबोड़ी का बीआरसी और जनशिक्षक ने आकस्मिक निरीक्षण किया था। निरीक्षण दौरान शाला बंद पाई गई और शाला में ताला लगा हुआ था। शाला में पदस्थ प्राथमिक शिक्षक संतोष मेश्राम और ओमप्रकाश कटरे अनुपस्थित पाए गए। शाला में मध्याह्न भोजन भी बंद पाया गया। इस तरह से शिक्षकों द्वारा लगातार लापरवाही बरती जा रही है। इन दोनों शिक्षकों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
जिला मुख्यालय से करते हैं आवागमन
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित शालाओं में पदस्थ अधिकांश शिक्षक जिला मुख्यालय से आवागमन करते हैं। जिसके कारण वे शाला में देरी से पहुंचते हैं। इतना ही नहीं शाम के वक्त घर आने की जल्दी के चलते शाला से समय से पहले ही निकल जाते हैं। जबकि शासन-प्रशासन के स्पष्ट निर्देश है कि जो शिक्षक जहां पदस्थ है, वह उसी मुख्यालय में निवास करें। लेकिन इस निर्देश का शिक्षकों द्वारा कोई पालन नहीं किया जाता है। इतना ही नहीं ऐसे शिक्षकों पर कार्यवाही नहीं होने से वे मनमानी कर रहे हैं।
शिक्षण कार्य भी होता है प्रभावित
शिक्षकों की मनमानी के चलते स्कूलों में शिक्षण कार्य भी काफी प्रभावित होता है। दूरस्थ अंचलों में ग्रामीणों में जागरुकता की कमी के चलते लोग शिक्षकों की मनमानी का विरोध नहीं जता पाते, कुछेक स्थानों में इसका विरोध भी किया जाता है लेकिन शिक्षकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है।
इनका कहना है
लालबर्रा विकासखंड के शासकीय हाईस्कूल चिचगांव का निरीक्षण किया गया था। दो शिक्षिकाएं अनुपस्थित पाई गई थी लेकिन उपस्थिति पंजी में उनके हस्ताक्षर थे। दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। संतोषप्रद जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी।
-एके उपाध्याय, डीईओ, बालाघाट
