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347 करोड़ के घोटालेबाज 49 अफसरों की संपत्ति की जानकारी जुटाने का जिम्मा ईई को


भोपाल। हरसी उच्च स्तरीय नहर निर्माण के 347 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला लगभग 15 साल से न्यायालय में लंबित रहने के बाद अचानक सुर्खियों में आ गया है। ईडी ने इस मामले की जांच तेज करते हुए परियोजना के दस्तावेज व जानकारी देने के लिए जल संसाधन के कार्यपालन यंत्री पंकज सेंगर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। ईडी ने उन अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों की भी जानकारी मांगी है, जिन पर ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की है। यह जानकारी संभवत शासन को हुए नुकसान की वसूली के लिए मांगी गई है।
ईडी ने जल संसाधन विभाग से हरसी उच्च स्तरीय प्रोजेक्ट व आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो(ईओडब्लयू) द्वारा दर्ज किए गए मामले की जानकारी मांगी है। यह परियोजना ग्वालियर और भिंड जिलों में नहर के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी। जिसके निर्माण में कथित तौर पर 347 करोड़ का घोटाला सामने आया था और 49 अधिकारी, बैंक प्रबंधक व ठेकेदारों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। यह मामला न्यायालय में लगभग 15 वर्ष से विचाराधीन है। जिन अफसरों और ठेकेदारों पर प्रकरण दर्ज हुए थे उनमें से लगभग 11 की मौत हो चुकी है। ईओडब्लयू के तत्कालीन एसपी ओपी मित्तल ने 2009 में आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
ईडी ने मांगे हैं यह दस्तावेज
हरसी उच्च स्तरीय परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट, सहायक दस्तावेज। परियोजना में शामिल जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का विवरण व आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान के बिल। खरीदी गई सामग्री के मूल व संशोधित अनुमान के तहत प्रावधान व सहायक दस्तावेज। नहर के लिए राशि की स्वीकृति एवं नवीनीकरण स्वीकृति के संबंध में पत्रों व आदेशों का विवरण। सामग्री खरीदने के लिए जारी निविदाओं का विवरण। आपूर्तिकर्ताओं का विवरण और उनके बैंक खातों की जानकारी। आंतरिक, विभागीय व अंतिम जांच रिपोर्ट।

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