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ललित बेलवाल की पोस्टिंग का मामला, तत्कालीन एसीएस की नोटशीट से बड़ा खुलासा
-आईएएस कैडर में आईएफएस की नियुक्ति को बताया था अनुचित


भोपाल। मप्र के पूर्व आईएफएस ललित मोहन बेलवाल की नियुक्ति के मामले में नोटशीट पर सियासी बवाल शुरू हो गया है। कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह ग्रेवाल के सवाल में खुलासा हुआ है कि नियमों को दरकिनार कर बेलवाल की नियुक्ति हुई थी। तत्कालीन अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव की नोटशीट से यह खुलासा हुआ है। दरअसल, उन्होंने आईएएस के कैडर में आईएफएस की नियुक्ति को अनुचित बताया था। मनोज श्रीवास्तव ने बेलवाल की नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताई थी। साथ ही इस मामले में कलर्ड साइज ऑफ पावर का आरोप लगाया था।
नोटशीट में पद का दुरुपयोग, शक्ति का पक्षपात करने का जिक्र किया गया है। इस मामले में मनोज श्रीवास्तव ने लिखा- यदि कोई कार्य किसी तरह विशेष तरीके से किया जा सकता है तो इस मार्ग से किया जाए। किसी अन्य दूसरे तरीके से नहीं किया जाए। इस मामले को लेकर पंचायत मंत्री ने भी आपत्ति जताई थी। लेकिन उनके हस्तक्षेप के बाद भी नियुक्ति हुई थी। विधानसभा में मिली जानकारी के अनुसार ललित मोहन बेलवाल दिसंबर 2018 में सेवानिवृत्त हुए। 2020 में इकबाल सिंह के मुख्य सचिव बनने के बाद 18 जुलाई 2020 को संविदा आधार पर बेलवाल को ओएसडी बनाया गया। इससे एक दिन पहले 17 जुलाई को मिशन की प्रभारी सीईओ शिल्पा गुप्ता (आईएएस) को हटाया गया। 22 जुलाई को सीएस बैंस ने निर्देश दिए कि बेलवाल को सीईओ का प्रभार दिया जाए। सीएस की नोटशीट पर एसीएस मनोज श्रीवास्तव ने लिखा कि सीईओ का पद आईएएस कैडर का है। संविदा कर्मी को वित्तीय कार्य वाला सीईओ नहीं बनाया जा सकता। मंत्री महेन्द्र सिसौदिया ने भी श्रीवास्तव का समर्थन किया।
बैंस ने किया पद का दुरुपयोग
कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल के जवाब में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने विधानसभा में जानकारी दी है कि प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने आजीविका मिशन के ओएसडी ललित मोहन बेलवाल को मिशन के सीईओ प्रभार देने में पद का दुरुपयोग किया था। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी गुमराह किया। इतना ही नहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव और पंचायत मंत्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया की टीप को भी दरकिनार किया गया था। श्रीवास्तव ने अपनी टीप में लिखा था कि यह कलर्ड एक्सरसाइस ऑफ पॉवर (पद का दुरुपयोग) है। जिसका पूर्व मंत्री सिसौदिया ने भी समर्थन किया और बेलवाल को सीईओ का प्रभार देने का विरोध किया था। इकबाल सिंह बैंस ने नोटशीट पर लिखा था कि अन्य विभागों में संविदा पद पदस्थ अधिकारियों को प्रमुख दायित्व सौंपे जाते रहे हैं। आजीविका मिशन में संविदा पर ओएसडी बनाए गए बेलवाल को इस शर्त पर मिशन के सीईओ का प्रभार दिया गया था कि यह नियुक्ति अस्थाई है। आईएएस की पदस्थापना होने तक हैं। इसके बाद 3 साल तक किसी आईएएस को आजीविका मिशन का सीईओ नहीं बनाया गया। 3 बाद संविदा नियुक्ति दी गई। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल का आरोप है कि इस दौरान 3 हजार हजार करोड़ का पोषण आहार घोटाला हुआ है। साथ ही करोड़ों की खरीदी की गई। इस संबंध में विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने प्रतिक्रया देने से इंकार किया। ललित मोहन बेलवाल को आजीविका मिशन सीईओ बनाने के लिए सबसे पहले 17 जुलाई 2020 को प्रभारी सीईओ शिल्पा गुप्ता (आईएएस) को हटाया गया।
बैंस पर दर्ज हैं लोकायुक्त में प्रकरण
इकबाल सिंह बैंस और ललित मोहन बेलवाल पर पूर्व विधाक पारस सकलेचा की शिकायत पर पोषण आहार घोटाला और पद के दुरुपयोग के मामले में लोकायुक्त में जांच प्रकरण क्रमांक 598/2024 दर्ज है। जबकि 2017 में आजीविका मिशन का सीईओ रहते प्रदेश प्रबंधक के पद पर सुषमा रानी शुक्ला की फर्जी नियुक्ति करने के मामले में बेलवाल पर ईओडब्ल्यू में मामला दर्ज है।

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