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महाराष्ट्र सरकार हिंदू-मुस्लिम अफसरों को मिलाकर एसआईटी बनाए
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र के 2023 अकोला दंगों की जांच पर कहा कि पुलिस वर्दी पहनने के बाद अफसरों को जाति और धर्म से ऊपर उठकर सिर्फ कानून के अनुसार काम करना चाहिए। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि दंगों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल बनाया जाए, जिसमें हिंदू और मुस्लिम समुदाय के सीनियर ऑफिसर शामिल हों।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच 17 साल के मोहम्मद शरीफ की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। शरीफ ने याचिका में कहा कि दंगों के दौरान मुझ पर हमला हुआ, लेकिन महाराष्ट्र पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और न ही जांच की। दरअसल, महाराष्ट्र के अकोला में मई 2023 में हुए दंगों में 1 व्यक्ति की मौत हुई थी और दो पुलिसकर्मियों समेत आठ लोग घायल हुए थे।
अकोला में दो समुदाय के बीच पत्थरबाजी
महाराष्ट्र के अकोला में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर 13 मई 2023 को दो समुदाय के बीच हुई हिंसक हुई थी। अकोला एसपी संदीप घुघे ने बताया था- ओल्ड सिटी इलाके में मामूली बात पर दो समुदाय के बीच पत्थरबाजी हुई थी। उपद्रवियों ने कई वाहन जला दिए। कुछ लोगों ने थाने का घेराव करने की भी कोशिश की थी। इस दौरान विलास महादेवरो गायकवाड़ नाम के व्यक्ति की मौत हो गई थी और दो पुलिसकर्मियों समेत आठ लोग घायल हुए थे। मोहम्मद शरीफ ने इससे पहले जुलाई 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर खंडपीठ) में याचिका लगाई थी लेकिन, हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

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