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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि पत्नी पति से भरण-पोषण का दावा करती है, लेकिन अपनी नवीनतम सैलरी स्लिप या इनकम की सही जानकारी पेश नहीं करती, तो कोर्ट उसके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकती है। जस्टिस डॉ. स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई करते हुए की। हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी की वित्तीय कठिनाई साबित किए बिना उसका दावा केवल काल्पनिक माना जाएगा और इस आधार पर उसे भरण-पोषण नहीं दिया जा सकता है।
यह मामला उस पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा था, जिसमें पत्नी ने फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने पति को अपनी नाबालिग बेटी का भरण-पोषण देने का आदेश तो दिया था, लेकिन पत्नी को राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि पत्नी ने अपनी वास्तविक आय छिपाई है और हालिया सैलरी सर्टिफिकेट पेश नहीं किया। रिकॉर्ड में मौजूद दिसंबर 2016 की वेतन स्लिप के मुताबिक महिला का वेतन 33,052 रुपए था, जबकि उसने अपनी मौजूदा आय मात्र 10,000 रुपए प्रति माह बताई थी। कोर्ट ने माना कि आय को लेकर अस्पष्टता होने पर भरण-पोषण का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

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