
इन्दौर। विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) शिप्रा पटेल की कोर्ट ने अपनी 12 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले 35 वर्षीय आरोपी पिता को धारा 5 (एल)/6, 5 (एन) /6 एवं 5 (एम)/10 पॉक्सो अधिनियम में दोषी करार देते इस टिप्पणी के साथ कि आरोपी ने पिता-पुत्री के पवित्र रिश्ते को शर्मशार किया है। इस कारण आरोपी को न्यूनतम दण्ड दिया जाना विधीपूर्ण नहीं होगा पृथक पृथक तीन बार आजीवन कारावास व कुल 15 हजार रुपए अर्थदण्ड से दंडित करते पीड़ित प्रतिकर योजनान्तर्गत पीड़िता को तीन लाख रुपए की राशि प्रदाय करने की अनुशंसा शासन से की है। प्रकरण में अभियोजन पैरवी विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर ने की। जिला लोक अभियोजन अधिकारी राजेंद्र सिंह भदौरिया के अनुसार 21 जुलाई 2024 को पीडिता की मां ने थाना आजाद नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि वर्ष 2012 में उसका अभियुक्त के साथ प्रेम विवाह हुआ था। इससे उसके दो बच्चे पीडिता (उम्र 12 वर्ष) एवं पुत्र उम्र 6 वर्ष है। वर्ष 2020 में उसका आरोपी से तलाक हो गया था। तलाक के बाद उसकी पीडिता पुत्री आरोपी के साथ रहती थी व पुत्र उसके साथ निवास करता था। 21 जुलाई 2024 को बालिका अपनी मुंहबोली मौसी के पास रोते हुए पहुंची थी और बताया कि पिता घर पर अकेले होने पर कई बार उसके साथ गलत काम करते हैं। पहली बार यह घटना दो वर्ष पहले नए घर में हुई थी और हाल ही में 15 दिन पहले भी दोबारा रेप किया गया। बालिका ने कहा था कि उसने दो-तीन बार दादी को भी इस बारे में बताया था, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद पड़ोस में रहने वाली मुंह बोली मौसी ने उसकी नानी को फोन कर पूरी घटना बताई। जिसके बाद नानी ने बेटी (बालिका की मां) को बुलाया और थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते आरोपी को गिरफ्तार कर विवेचना उपरांत प्रकरण चालान कोर्ट में पेश किया जहां सुनवाई करते सक्षम न्यायालय ने निर्णय सुनाया।
