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फैसला न हो पाने से प्रदेश के करीबन 80 हजार अभ्यर्थी प्रभावित
भोपाल । मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर से शुरू होने जा रही है। 22 सितंबर से ओबीसी आरक्षण को लेकर लगातार सुनवाई होगी। ओबीसी आरक्षण पर अंतिम फैसले का प्रदेश के कर्मचारियों और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को है। मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर फैसला न हो पाने से प्रदेश के करीबन 80 हजार अभ्यर्थी प्रभावित हैं, करीब 9 हजारी सरकारी नौकरियां होल्ड पर बनी हुई हैं।
फैसला होने के बाद यह पद या तो सामान्य वर्ग के खाते में जाएंगे या फिर 27 फीसदी आरक्षण के तहत इसका लाभ ओबीसी वर्ग को मिलेगा। लंबे समय से अटके इस मामले का सबसे बड़ा खामियाजा उन युवाओं को उठाना पड़ा है, जो नौकरी के आस में निर्धारित उम्र की सीमा ही पार का चुके हैं।
13 फीसदी पद होल्ड पर रखे गए
मध्य प्रदेश में मार्च 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी कर दिया था। हालांकि मार्च 2020 में हाईकोर्ट ने कमलनाथ सरकार के निर्णय पर रोक लगा दी थी। आरक्षण का मामला अटकने की वजह से इस दौरान पीएससी और कर्मचारी चयन आयोग द्वारा की गई भर्तियों में से करीब 9 हजार पदों के रिजल्ट पर रोक लगा दी। ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य एडवोकेट धमेन्द्र सिंह कुशवाहा कहते हैं कि इसका असर सिर्फ 9 हजार अभ्यर्थियों पर नहीं पड़ा, बल्कि उन सभी अभ्यर्थियों पर पड़ा, जो इन परीक्षाओं में बैठे थे। इनमें से कई नौकरी के इंतजार में ही ओवर एज हो गए। इनमें सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थी शामिल हैं।
अनहोल्ड किए जाने की उठती रही मांग
ओबीसी आरक्षण के मामले में लगातार होल्ड किए गए 13 फीसदी पदों को अनहोल्ड किए जाने की मांग लगातार उठती रही है। एडवोकेट धर्मेन्द्र सिंह कुशवाहा कहते हैं कि जब सरकार कह रही है कि वह 27 फीसदी आरक्षण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, तो फिर सरकार 13 फीसदी पदों को अनहोल्ड क्यों नहीं कर रही। हाल ही में जो पीएससी के परिणाम आए हैं, उसमें भी 13 फीसदी पद होल्ड कर लिए गए। पिछले दिनों हुई बैठक में भी महाधिवक्ता प्रशांत सिंह इसको लेकर बात टालते रहे।
इस तरह उलझता रहा ओबीसी आरक्षण
2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण का फैसला लिया और इसे 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी किया गया। मार्च 2020 में सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई और कोर्ट ने 27 फीसदी आरक्षण पर रोक लगा दी। सितंबर 2021 में राज्य सरकार ने आरक्षण को लेकर गाइडलाइन जारी की। राज्य शासन ने ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने की अनुमति दे दी। अगस्त 2023 में मामला फिर हाईकोर्ट पहुंचा। जबलपुर हाईकोर्ट ने 87:13 फॉर्मूला लागू करते हुए एमपीपीएससी के 87 फीसदी पदों पर भर्ती की अनुमति देते हुए, 13 फीसदी पदों को होल्ड पर करने के आदेश दिए। 87 का मतलब अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति जनजाति व सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित कुल आरक्षण के 87 फीसदी। 28 जनवरी 2025 में ओबीसी आरक्षण को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 87:13 के फार्मुले को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज दी। 13 फरवरी 2025 को राज्य सरकार 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची। एमपी सरकार ने मामले में जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दिया।

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