
कारोबारी से मामला निपटाने के नाम पर 25 लाख की रिश्वत मांगी
जोधपुर। स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने आयकर विभाग के पूर्व मुख्य आयकर आयुक्त (चीफ कमिश्नर) पवन कुमार शर्मा और पूर्व आयकर अधिकारी (आईटीओ) शैलेंद्र भंडारी को रिश्वत मामले में चार-चार साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं बिचौलिये की भूमिका निभाने वाले सुनार चंद्रप्रकाश कट्टा को सीबीआई कोर्ट ने बरी किया है।
यह मामला साल 2015 का है, जब बाड़मेर के कारोबारी किशोर जैन ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि आयकर अधिकारियों ने उसकी टैक्स देनदारी 2.5 से बढ़ाकर 12 करोड़ कर दी और मामले को निपटाने के लिए उनसे 25 लाख रुपये रिश्वत मांगी। इसके बाद में डील 23 लाख में तय हुई। शिकायत पर सीबीआई ने ट्रैप ऑपरेशन कर 31 मार्च 2015 को आईटीओ अधिकारी भंडारी को 15 लाख रुपये लेते समय रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
जांच में सामने आया कि यह रिश्वत शर्मा की ओर से ली जा रही थी। सीबीआई ने दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान शर्मा की संपत्ति और जीवनशैली ने सभी को चौंका दिया। उनके जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बेंगलुरु में करीब 400 करोड़ रुपये की संपत्ति मिली, जिसमें लग्जरी बंगले और फार्महाउस शामिल थे। उनके घरों में हर कमरे में 18-18 हजार रुपये के डिजाइनर पंखे लगे थे। उन्हें चांदी के कप में चाय पीने और सोने के चम्मच का इस्तेमाल करने का शौक था। साथ ही घर से 50 बोतल विदेशी शराब भी बरामद की गई।
सीबीआई ने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। नवंबर 2015 में जोधपुर में उनकी आठ संपत्तियों पर छापेमारी भी हुई थी। अधिकारियों को विभाग से निलंबित किया और बाद में वे जमानत पर बाहर आ गए थे। करीब 9 साल बाद आए फैसले ने फिर दिखा दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी भी बख्शे नहीं जाते। कोर्ट ने माना कि व्यापारी पर गलत तरीके से दबाव बनाकर घूस मांगी गई थी।
