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जबलपुर। हाईकोर्ट ने इंदौर स्थित आस्था एजुकेशन सोसायटी के पदाधिकारियों को बड़ा झटका देते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच जारी रखने के आदेश दिए हैं। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने सोसायटी की याचिका को निरस्त करते हुए कहा कि प्राथमिकी का पंजीकरण प्रसिद्ध लेखा परीक्षकों की ऑडिट रिपोर्ट पर आधारित है, जिनकी रिपोर्टें सरकार द्वारा मान्य हैं और इनमें बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का उल्लेख है।
आस्था सोसायटी की पदाधिकारी श्वेता चौकसे, जय नारायण चौकसे, धर्मेन्द्र गुप्ता और अनुपम चौकसे ने याचिका में कहा था कि उनकी संस्था एक निजी सोसायटी है, जो 2007 में गठित हुई थी और कई शैक्षणिक संस्थान व अस्पताल संचालित करती है। उन्होंने तर्क दिया कि संस्था को सरकार से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती और उनके खिलाफ की गई शिकायतें पुराने आरोपों की पुनरावृत्ति हैं, जिन्हें पहले ही ईओडब्ल्यू ने खारिज कर दिया था। सोसायटी का कहना था कि ईओडब्ल्यू ने बिना नोटिस या स्पष्टीकरण का अवसर दिए बिना ही उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया और गिरफ्तारी की आशंका भी जताई गई थी।
दूसरी ओर, ईओडब्ल्यू की ओर से अदालत में केस डायरी प्रस्तुत कर कहा गया कि मामला प्रारंभिक जांच के चरण में है और इस अवस्था में प्राथमिकी रद्द करना उचित नहीं होगा। सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट में करीब 200 करोड़ रुपए की आर्थिक अनियमितता का उल्लेख है, ऐसे में याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने ईओडब्ल्यू को जांच जारी रखने के निर्देश दिए।

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