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शहर के 19 स्थानों पर रखी जाती हैं प्रतिमाएं…………
जबलपुर। बंग समाज का षष्ठी पूजा के साथ ही शहर के 19 स्थानों में मंगलवार को मां भगवती का अपने पूरे परिवार सरस्वती, लक्ष्मी, गणेश तथा कार्तिकेय के साथ पदार्पण हुआ। प्रात: काल ढाक, कांसोर, शंख, उुलु की ध्वनियों के साथ मां जगदंबे की आराधना की गई। कहा जाता है कि महिषासुर का मर्दन कर मां अपने परिवार के साथ अपने मायके आती हैं। जिस तरह बेटी के घर आने पर घर में खुशी और उत्सव का माहौल होता है ठीक उसी तरह बंग भाषी भी मां दुर्गा के आगमन पर खुशी से उनका स्वागत करते हैं तथा उत्सव के प्रमुख पांचों दिन पूजा पंडालों में ही वक्त बिताते हैं।
बोधन के साथ होती है पूजा की शुरूवात…………..
षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमीं एवं दसवीं तिथि बंग भाषियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। घट स्थापना षष्ठी के दिन ही होती है। घट की पूजा विवाहित महिलाएं ही करती हैं। षष्ठी के दिन शाम को बोधन के साथ प्रतिमा पूजन की शुरुवात होती है।
संतान की समृद्धि के लिए उपवास………
बंग समाज के पुत्रवत महिलाएं षष्ठी के दिन ही अपने बच्चों की सुख, समृद्धि और उनके स्वस्थ्य जीवन के लिए उपवास रखकर पूजन करती हैं। इसी तरह सप्तमी के दिन भी पूजा पंडालों में पुष्पांजलि अर्पित कर प्रसाद एवं भोग ग्रहण किया जाता है।
ढाक, ढोल और कांसार की थाप पर धुनिचि नृत्य……….
बंग समाज की पूजा में मिट्टी की पात्र में नारियल के छिलके रखकर एवं धूनी को जलाकर पात्र को हाथ में रख ढाक, ढोल और कांसार तथा शंख एवं उलु ध्वनि के साथ ताल से ताल मिलाकर भक्त नृत्य की प्रस्तुति देते हैं। सिटी बंगाली क्लब में पुरूषों के साथ महिलाएं भी धुनिचि नृत्य में शामिल होती हैं।
शहर के 19 स्थानों पर रखी जाती हैं प्रतिमाएं…………
बंग समाज की दुर्गा पूजा एवं प्रतिमाओं की स्थापना शहर के 19 स्थानों में होती है, जिनमें सिद्धिबाला बोस लायब्रेरी एसोशिएसन सिटी बंगाली क्लब करम चंद चौक, देवेन्द्र बंगाली क्लब जीसीएफ, प्रेमनगर कालीबाड़ी गुप्तेश्वर, माचा पूर्वी घमापुर, रामकृष्ण आश्रम पूर्वी घमापुर, क्यू टायप खमरिया कालीबाड़ी, टाईप टू खमरिया, बंगीय आनंद परिसर वेस्ट लैंड, चंदन कॉलोनी रांझी, बानी संधु काली बाड़ी, बंगाली कॉलोनी रांझी, विवेक वीएफजे स्टेट, रेलवे कर्मचारी पूजा समिति, नर्मदा बंगाली पूजा समिति, टैगोर नगर, स्टेशन दुर्गा पूजा गैरीसन ग्राउंड, अग्रवाल कॉलोनी, रविन्द्र नगर अधारताल, सुभाष नगर महाराजपुर, पीएनटी कॉलोनी गढ़ा रोड शामिल हैं।
दर्पण में मां के चरण दर्शन से होगी विदाई………
दशहरा पर्व की दसवीं तिथि को दर्पण व जल में मां के पैरों के दर्शन के बाद मां भगवती की विदाई की परंपरा है। इसी दिन विवाहित महिलाएं मां को सिंदूर अर्पण कर उस सिंदूर को एक दूसरे को लगाती हैं, जिसे सिंदूर उत्सव कहा जाता है। अपने अखंड सौभाग्य के लिए सिंदूर एक दूसरी विवाहित महिलाओं को लगाने की बंग समाज की परंपरा है।
बंगाली समाज दुर्गा पूजन कार्यक्रम………
आज 9 अक्टूबर महासप्तमी को सिटी बंगाली क्लब में प्रात: सात बजे से पूजा, अंजलि, प्रसाद, भोग वितरण, चित्रकला प्रतियोगिता, संध्या 7.30 बजे आरती, डीबी क्लब में प्रात: 7 बजे से पूजा, अंजलि, प्रसाद, भोग वितरण, संध्या 8 बजे सत्यजीत दास कोलकाता द्वारा गीत संगीत कार्यक्रम। प्रेमनगर काली बाड़ी प्रात: 7 बजे से पूजा, अंजलि, प्रसाद, भोग वितरण, कार्यक्रम होंगे।

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