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कोर्ट ने कहा पासपोर्ट बनवाना और देश से बाहर जाना दोनों अलग-अलग चीजें
इन्दौर। उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने पासपोर्ट बनवाने को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय में निचली कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए पासपोर्ट आफिस को आदेश दिया है कि सिर्फ पासपोर्ट बनवाने के लिए कोर्ट से विदेश जाने की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है चाहे आवेदनकर्ता के खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण लम्बित हो अथवा किसी मामले में कोर्ट ने उसके विदेश जाने पर रोक लगाई हो। कोर्ट ने कहा कि विदेश जाना और विदेश जाने के लिए पासपोर्ट बनवाना दोनों अलग-अलग क्रिया है। अतः आपराधिक मामले लंबित होने के बावजूद पासपोर्ट बनवाने हेतु दिए आवेदन में कोर्ट द्वारा विदेश जाने की अनुमति आवश्यक नहीं है। यह अनुमति तभी जरूरी है जब उसे वाकई में देश से बाहर जाना हो। कोर्ट के इस फैसले से कई लोगों को राहत मिलेगी। कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण फैसला क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, भोपाल द्वारा एक व्यापारी को आपराधिक प्रकरण के लंबित रहने के दौरान पासपोर्ट बनवाने के लिए कोर्ट से देश से बाहर जाने की अनुमति लाने हेतु कहा जबकि उसने पासपोर्ट कार्यालय में अपने आवेदन के साथ कोर्ट द्वारा पासपोर्ट बनवाने की अनुमति भी पासपोर्ट कार्यालय को दी थी इसके बावजूद पासपोर्ट कार्यालय ने उसके आवेदन को खारिज करते कोर्ट से विदेश जाने की अनुमति लाने के लिए कहा। जिस पर व्यापारी ने अधिवक्ता अधिवक्ता विस्मित पानीत एवं प्रणिती शर्मा के जरिए हाइकोर्ट में याचिका दायर करते याचिका में कोर्ट को बताया कि उस सहित कुछ अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध पुलिस ने वर्ष 2015 में दंगा करने और अवैध रूप से एकत्रित होने की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था, जो पिछले 10 साल से लंबित है। अपने व्यापार के लिए देश से बाहर जाने की आवश्यकता महसूस होने पर निचली कोर्ट में पासपोर्ट बनवाने की अनुमति देने के लिए एक आवेदन लगाया था इस पर आदेश देते हुए निचली कोर्ट ने कुछ शर्तों के अधीन पासपोर्ट बनवाने हेतु याचिकाकर्ता को अनुमति जारी कर दी थी। निचली कोर्ट द्वारा पासपोर्ट बनवाने की अनुमति होने के बावजूद क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, भोपाल द्वारा पासपोर्ट आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कोर्ट से देश से बाहर जाने की अनुमति भी लानी होगी इसके चलते निचली अदालत में जब इस बाबत आवेदन लगाया गया तो कोर्ट ने उस आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि पूर्व में दी गई शर्तों में अब कोई फेर-बदल नहीं होगा। याचिका सुनवाई के दौरान एडवोकेट विस्मित पानीत ने हाइकोर्ट के सामने सारे तथ्य रखते हुए पूर्व आदेशों का हवाला दिया। इस पर न्यायालय ने भी रितेश उर्फ चम्पू अजमेरा और अन्य मामलों का हवाला देते हुए कहा कि पासपोर्ट कार्यालय द्वारा लगाई गई शर्त गलत है। पासपोर्ट बनवाने की अनुमति देना और देश से बाहर जाने की अनुमति देना दोनों अलग-अलग चीजे है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते कहा कि मात्र पासपोर्ट बनवाने के लिए देश से बाहर जाने की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। अधिवक्ता विस्मित पानीत का कहना है यह फैसला उन लोगों के लिए राहत भरा है जो आपराधिक मामले में फंसे हुए हैं और उन्हें अपने काम या अन्य आवश्यकताओं के लिए देश से बाहर जाने हेतु पासपोर्ट बनवाने या उसके नवीनीकरण कराने की जरूरत पड़ती है।

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