
नई दिल्ली । दुनिया में तानाशाहों की कोई कमी नहीं है, इसका प्रमुख कारण संचार के साधनों का विस्तार है, जो हमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हो रही घटनाओं के बारे में बताता है। इसके बावजूद, कई राष्ट्राध्यक्ष आज भी सभी शक्तियों को अपने हाथों में केंद्रित करने और तानाशाह बनने से नहीं डरते। इन्हें में से कुछ के बारे में हम बात रहे है।
व्लादिमीर पुतिन (रूस):
पुतिन को पश्चिमी देशों द्वारा तानाशाहों की सूची में पांचवें नंबर पर रखा गया है। पुतिन पर आरोप है कि वे रूसी नागरिकों की स्वतंत्रता को सीमित करते हैं। पुतिन आलोचना, विरोध और स्वतंत्र पत्रकारिता को सहन नहीं करते और बल प्रयोग के माध्यम से विरोध की आवाजों को दबाते हैं।
बशर अल-असद (सीरिया):
सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने 21 वर्षों तक शासन किया है। एक डॉक्टर होकर भी उन्होंने अपने देश को गृहयुद्ध में धकेल दिया। असद अपने विरोधियों को दबाने के लिए सेना और हथियारों का प्रयोग करने के लिए कुख्यात हैं। उनके शासन में कई पत्रकारों और नेताओं की हत्या की गई और उन पर अपने नागरिकों पर रासायनिक हमले के आरोप भी लगे हैं।
फिदेल और राउल कास्त्रो (क्यूबा):
क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो और उनके भाई राउल कास्त्रो पर तानाशाही से शासन करने के आरोप हैं। उन्होंने अपने शासनकाल में सैकड़ों पत्रकारों, असंतुष्टों और नागरिकों को सताया, कैद किया और मार डाला। उनके नेतृत्व में क्यूबा की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि जीवन स्तर पिछले 50 वर्षों से न्यूनतम स्तर से नीचे है।
किम जोंग उन (उत्तर कोरिया):
किम जोंग उन उत्तर कोरिया के वंशानुगत राष्ट्रपति हैं। उ.कोरिया में कोई चुनाव नहीं होते, और सत्ता विरासत में मिलती है। किम जोंग उन भय पैदा करके शासन करते हैं। उत्तर कोरिया में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का कोई अस्तित्व नहीं है, और केवल राज्य मीडिया ही मौजूद है।
इसाईस अफेवेर्की (इरीट्रिया):
इरीट्रिया के राष्ट्रपति इसाईस अफेवेर्की को दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह बताया जाता है। उनकी तानाशाही पूरी तरह से भय और क्रूरता पर है। उन पर मानवता के विरुद्ध अपराधों का आरोप लगाया गया है, और वे करीब सभी नागरिकों को सेना में शामिल होने के लिए बाध्य करते हैं।
