
अब कहीं से भी बैठकर करा सकते हैं रजिस्ट्री
भोपाल। प्रदेश में अब रजिस्ट्री संपदा 2.0 सॉफ्टेवर से होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार दोपहर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कनवेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में पंजीयन विभाग द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर संपदा -2.0 के ई-पंजीयन एवं ई-स्टॉम्पिंग का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने की। सीएम यादव ने विभागीय अधिकारियों से संपदा-2.0 की विशेषताओं पर चर्चा भी की। इस सॉफ्टवेयर से प्रदेश के सभी जिलों में रजिस्ट्री और प्रॉपर्टी खरीदने के लिए घर बैठे ई पंजीयन किया जा सकेगा। ई साइन और डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से रजिस्ट्री का काम हो सकेगा। प्रॉपर्टी खरीदने वाले को पता चल जाएगा कि उस प्रॉपर्टी पर कितना लोन बकाया है। इसके साथ ही प्रॉपर्टी की पहचान कस्टोडियम डिपार्टमेंट से कराई जा सकेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ मनमोहन सिंह 10 साल प्रधानमंत्री रहे, वित्त मंत्री रहे और गवर्नर भी रहे, लेकिन वे भी ऐसी तकनीक नहीं विकसित कर पाए जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित कर दी। पीएम मोदी ने जीरो बजट से देश के गरीब लोगों की परेशानियों को ध्यान रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जो व्यवस्था शुरू हुई है, उसमें नामांतरण के साथ बटांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो रही है। इसके लिए अलग आवेदन नहीं करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप कितने भी पढ़े लिखे हो, लेकिन यहां आने पर अंगूठा ही लगाना पड़ता है। अब तकनीकी के दौर में सभी चीजों को डेवलप करना जरूरी भी है।
नामांतरण प्रक्रिया भी होगी आसान
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जो व्यवस्था शुरू हुई है, उसमें नामांतरण के साथ बटांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो रही है। इसके लिए अलग आवेदन नहीं करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप कितने भी पढ़े लिखे हों, लेकिन यहां आने पर अंगूठा ही लगाना पड़ता है। अब तकनीकी के दौर में सभी चीजों को डेवलप करना जरूरी भी है। उन्होंने कहा कि कभी वर्षों में संपन्न होने वाली नामांतरण की प्रक्रिया आज 1-2 सप्ताह में ही पूर्ण हो जाती हैं।
चार जिलों में सफल रहा पायलट प्रोजेक्ट
उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने बताया कि पिछले चार माह से गुना, हरदा, डिंडौरी और रतलाम में इसका प्रयोग सफल रहने के बाद सभी जिलों में लागू किया जा रहा है। संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में राज्य शासन का यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही प्रदेश में रजिस्ट्री के नए नियम लागू किए जाएंगे। देश में पहली बार पूर्णत: पेपरलेस और फेसलेस पंजीकरण की सुविधा लोगों को दी जा रही है।
आसान होगी प्रक्रिया
संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर द्वारा संपत्तियों का अंतरण, लोन इत्यादि दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण रूप से डिजिटली ही किया जाएगा। अगर उस दस्तावेज पर लोन लिया गया होगा, तो उसकी जानकारी भी इसमें देखी जा सकेगी। साथ ही संपत्ति की पहचान कस्टोडियम डिपार्टमेंट से की जाएगी। पंजीयकों की पहचान ई-केवाईसी के माध्यम से पूर्ण की जाएगी। इसमें घर बैठे पंजीयन एवं ई-स्टांपिंग की सुविधा भी होगी।
ई-गवर्नेंस में सुविधाजनक
दस्तावेजों की ई-कापी डिजी लॉकर, वाट्सएप, और ईमेल के माध्यम से उपलब्ध होगी। साथ ही ई-स्टांप सृजित करने की सुविधा भी होगी। संपत्ति की सर्च प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है। संपदा 2.0 विशेष मोबाइल एप भी लांच किया जा चुका है। यह नवाचार न केवल आमजन के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि प्रदेश को ई-गवर्नेंस की दिशा में भी आगे बढ़ाएगा।
यह मिलेगी सुविधा
अब मकान, दुकान और जमीन खरीदने वाले किसी भी ऑनलाइन पोर्टल से कियोस्क, सर्विस प्रोवाइडर या विदेश से या प्रदेश के बाहर होने पर भी रजिस्ट्री करा सकेंगे। नए सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 में रजिस्ट्री कराने वाला खुद ही अपने डॉक्यमेंट ऑनलाइन सबमिट कर सकेगा। पोर्टल से ही डॉक्यूमेंट लिखा और भेजा जाएगा। पक्षकारों की पहचान आधार और पैन कार्ड से होगी। ईकेवायसी से पहचान की प्रक्रिया होगी। प्रॉपर्टी की पहचान नक्शे पर जियो टेगिंग से होगी। इसके चयन से ही जिया टेगिंग के अनुसार प्रॉपर्टी का मूल्यांकन और स्टाम्प ड्यूटी आ जाएगी। रजिस्ट्री के बाद दोनों पक्षों को मेल या वाट्सप पर ही रजिस्ट्री के डॉक्यूमेट मिल जाएंगे। नए नियमों में गवाहों की जरूरत नहीं होगी। अब दस्तावेज डिजिटल और ई साइन के आधार पर मान्य होंगे। वहीं, कई प्रकरण में सीधे संवाद की जरूरत नहीं होगी। नए सॉफ्टवेयर में कोई भी व्यक्ति ई स्टापिंग को अपने मोबाइल या कम्प्यूटर से जनरेट कर सकेंगा। इससे स्टाम्प खरीदने की प्रक्रिया और सरल हो जाएगी। दस्तावेज की ई कॉपी डीजी लाकर, वाट्सअप और ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध होगी। व्यक्ति क पहचान उनके बायोमेट्रिक द्वारा स्थापित की जाएगी।
