Spread the love

क्या अब रुमालों का कैसे इस्तेमाल हो, इस पर भी हम नजर रखें?
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को वकीलों के पहनने वाले बैंड्स से जुड़ी एक याचिका पहुंची। इसमें कहा गया कि इस्तेमाल के बाद इन बैंड्स के निपटान के लिए एक समान व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाएं। खास बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार से इनकार कर दिया है। साथ ही बेंच ने सवाल उठाया है कि क्या अब रुमालों का कैसे इस्तेमाल हो, इस पर भी हम नजर रखें?
दरअसल याचिकाकर्ता साक्षी विजय ने जनहित याचिका दाखिल की थी। उन्होंने मांग की थी कि इन बैंड्स को इकट्ठा करने और निपटान के लिए एक समान और ईको-फ्रैंडली व्यवस्था की जाए। सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक याचिका देख कोर्ट ने कहा कि हमारा काम फिर कहां खत्म होगा? इसकी निगरानी करना कि रुमालों का इस्तेमाल कैसे हो रहा है? या गांव में कचरे का किया जा रहा है?… हमें रिट कहां जारी करनी चाहिए। याचिकाकर्ता जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्हें कोर्ट के बाहर कचरे के डिब्बे के पास, फुटपाथ के पास सिंथैटिक बैंड्स पड़े मिले थे। इसमें कहा गया है कि हालात पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं और पेशे की गरिमा को दर्शाते हैं।
याचिका में इस बात पर जोर दिया था कि सफेद बैंड्स के सम्मान के साथ निपटान की कोई नीति नहीं है। साथ ही पर्यावरण के लिहाज से भी मौजूदा हालात पर सवाल उठाए गए थे। याचिका में कहा गया था कि पहले के समय में वकील कॉटन के बैंड्स का इस्तेमाल करते थे, जो धुलकर दोबारा इस्तेमाल हो सकते थे। जबकि, मौजूदा स्थिति में बैंड्स सिंथैटिक के हैं और नॉन बायोडिग्रेडेबल हैं। ये 10 रुपए के आते हैं और कई वकील एक बार के इस्तेमाल के बाद इन्हें फेंक देते हैं। याचिका में कहा गया कि ऐसे हजारों बैंड्स रोज फेंके जा रहे हैं, जिन्हें डिकम्पोज होने में 200 साल से ज्यादा का समय लगेगा। याचिका में पर्यावरण (सुरक्षा) कानून का हवाला दिया गया। उनकी मांग की थी कि भारतीय बार काउंसिल और संबंधित सरकारी मंत्रालयों को बैंड डिस्पोजल बिन लगाने के निर्देश दे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *