
दमोह : शहर के एक गरिमामय साहित्यिक समारोह में कृतिकार आभा द्विवेदी की पुस्तक ‘मां से पूछो’ का विमोचन कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के मुख्य आतिथ्य तथा लेखक, आलोचक एवं वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र दुबे की विशिष्ट उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में टाइम्स ग्रुप के चेयरमैन सुशील गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन, दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। स्वागत भाषण में सुशील गुप्ता ने कहा कि रचनात्मक और साहित्यिक गतिविधियाँ समाज को नई सोच और दिशा देती हैं। संवेदनशील विषय पर आधारित यह पुस्तक न केवल पठनीय है, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी सशक्त माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि यह कृति लेखिका के स्वर्गीय पिता एवं स्वर्गीय ससुर के आशीर्वाद से संभव हो सकी है और आशा व्यक्त की कि यह अधिक से अधिक पाठकों तक पहुँचे। मुख्य अतिथि कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चे का पहला संसार मां का गर्भ और जन्म के बाद मां का आंचल होता है। जीवन के शुरुआती कदम मां के सहारे ही बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि स्त्री के मानसिक और भावनात्मक संसार को पुरुष पूरी तरह समझ नहीं पाता। पीरियड्स जैसे विषय परिवार में केवल मां, बेटी और दादी तक सीमित रह जाते हैं, बेटों को इससे दूर रखा जाता है। यही कारण है कि विवाह के बाद भी पत्नी के इस दर्द को समझने में पुरुष असमर्थ रहते हैं। ‘मां से पूछो’ पुस्तक स्त्री के मनोविज्ञान को गहराई और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है।
विशिष्ट अतिथि नरेंद्र दुबे ने कहा कि लेखिका ने नारी जीवन की कथा और व्यथा को अत्यंत संवेदनशील ढंग से अभिव्यक्त किया है। नारी जीवन की जटिलताओं और पीड़ाओं को अंतर्मन से प्रस्तुत करना इस कृति की प्रमुख विशेषता है।
कृतिकार आभा द्विवेदी ने पुस्तक लेखन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से वे लोगों को अपने शरीर के प्रति जागरूक करना चाहती हैं। मां शरीर का सृजन करती है, संतान को जन्म देने में असहनीय पीड़ा सहती है, फिर भी उसे व्यक्त नहीं करती और संतान के पालन-पोषण में जुट जाती है। उन्होंने कहा कि लोग बड़े होकर लापरवाही, नशे और गलत आदतों से अपने शरीर को नुकसान पहुँचाते हैं और मां के त्याग, धैर्य व सहनशीलता को भूल जाते हैं। बेटी बचपन से ही दर्द सहना सीखती है और सृजन का कार्य करती है, इसलिए शरीर की रक्षा और सम्मान अत्यंत आवश्यक है। यह पुस्तक समाज में सकारात्मक जागरूकता लाएगी। कार्यक्रम का सफल संचालन राजीव अयाची ने किया जहां नगर के गणमान्य नागरिकों, साहित्य प्रेमियों, प्रबुद्धजनों एवं कॉलेज स्टाफ की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ी।
