
इन्दौर । मध्य प्रदेश की इंदौर पुलिस के लिए एक हाई-प्रोफाइल ड्रग्स ज़ब्ती का मामला बड़ी शर्मिंदगी का कारण बन गया था जब फरवरी 2025 में तेजाजी नगर पुलिस द्वारा जब्त की गई कथित ₹2 करोड़ की एमडी ड्रग फोरेंसिक जांच में सामान्य यूरिया (पोटेशियम नाइट्रेट) निकली थी। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद जिला अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
क्या था मामला?
26 फरवरी 2025 को, तेजाजी नगर पुलिस ने एबी रोड बाईपास के पास कस्तूरबा ग्राम में दो बाइक सवार युवकों मंदसौर के विजय पाटीदार और आज़ाद नगर के मोहम्मद शाहनवाज़ को रोका था। पुलिस ने शाहनवाज़ की जेब से 198 ग्राम सफेद पाउडर बरामद करने का दावा किया और इसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ₹2 करोड़ मूल्य की वाणिज्यिक-ग्रेड एमडी ड्रग बताया। दोनों को एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था। बाद में एक पुलिस कांस्टेबल, लखन गुप्ता, का नाम भी इस मामले में आरोपी के तौर पर जोड़ा गया।
जांच रिपोर्ट ने पलट दी कहानी –
पुलिस ने ज़ब्त पदार्थ को भोपाल स्थित राज्य फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) में जांच के लिए भेजा। जून 2025 में आई FSL रिपोर्ट ने पुलिस के दावों की हवा निकाल दी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि ज़ब्त पदार्थ एमडी ड्रग या कोई अन्य मादक पदार्थ नहीं, बल्कि पोटेशियम नाइट्रेट था, जो कि कृषि उर्वरक और पटाखों में इस्तेमाल होने वाला एक आम रसायन है।
फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद, तेजाजी नगर थाने के सब-इंस्पेक्टर मनोज दुबे और हेड कांस्टेबल देवेंद्र परिहार, अभिनव शर्मा, और कांस्टेबल गोविंदा व दीपेंद्र राणा सहित जांच दल के कुछ सदस्यों को पुलिस लाइन में भेज दिया गया था। वहीं आज़ाद नगर थाने के कोर्ट मुंशी, कांस्टेबल लखन गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन कोर्ट द्वारा मामला खारिज किए जाने के बाद उन्हें भी राहत मिल गई है। विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस द्वारा दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और सभी आरोपियों को राहत देते हुए मामले को खारिज कर दिया। इस घटना ने पुलिस की जांच प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, और अब इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने पर विचार किया जा रहा है ताकि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो सके।
